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Wednesday, March 4, 2026

होली 2026

जब जब भी आता है ये बद्र ए कामिल 

बहुत ख़ुशी हो जाती है हमको हासिल   

कल ख़ुसूफ़ था कई जगहों पर , मगर 

हमको बद्र देखना हो गया था  हासिल।


आज तोहफ़े में मिली है खेलने की होली 

साल में एक बार मिलती है ये हमजोली 

चाह कर भी हम छुपा न पायेंगे  ख़ुद को 

ढूँढ ही लेगी हमको आज कोई तो टोली।


फ़िर होगा सिलसिला शुरू गले मिलने का 

साथ में रंगीन गुलाल चेहरों पर लपेटने का 

थोड़ी सी देर में नज़र आयेंगे हम नए रंग में 

जब चढ़ जाएगा हम पर ख़ुमार, अबीर का।


ये होली का त्योहार है दिलों को पास लाने को 

अरसे से रूँठे हुए दिलों को फ़िर से मिलाने को 

जो चेहरे बारूद बन कर  बरसने को तैयार  बैठे 

उन चेहरों पर फिर मुस्कुराहटें वापस लाने को।


सब को मुबारक हो आज की होली की ये रंगत 

आजा ओ मेरे मेहरबान बैठ जाओ बना के पंगत 

सुनाओ एक एक करके अपनी पसन्द  का गाना 

ताकि याद रहे कभी जुटी थी एक सुरीली संगत!


बद्र ए कामिल = पूर्णिमा का पूरा चाँद।

ख़ुसूफ़ = चंद्रग्रहण।बद्र = पूनम।

अबीर = ख़ुशबूदार रंग।


सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 

अजित सम्बोधि 

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