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Saturday, January 31, 2026

Happy Birthday Pollyanna!

Hi! Happy birthday to you Pollyanna 

Yes, Pollyanna dressed in a bondanna!

So everyone gets much too overjoyed  

& feels like crying Hosanna! Hosanna!


Last year also you made it to the States

This year also you happen in the States!

Coincidence! Yes, but I miss hailing you 

Face to face according to heart’s dictates!


We have known each other only for a year 

I can’t think if there is anything to forbear 

Instead I find it has been too fruitful to me 

I recall the time you sat with my daughter!


Happy Birthday Pollyanna 

Ajit Sambodhi 

Friday, January 30, 2026

Jolly Infinity!

 Whose sky this is, I need not to know 

I am lying supine while I watch it grow 

It grows and grows, and turns quite big 

It doesn’t seem to know, it’s high or low.


It wraps me all around, and enters me 

The world goes out and I become free

Anon, I happen to forget, who is who?

Whether I’m inside it or it’s inside me.


The sky is too very vast but vaster here

A space is inside me, brighter and clear 

Where heart seems to melt, at each beat

How strange, no one seems to be aware!


Friends, as you lie under the infinite sky

Go on watching it, till tear drops  roll by  

Don’t forget to forget each & everything 

& don’t be surprised when joy comes by!


Jolly Infinity!

Ajit Sambodhi

Friday, January 23, 2026

आगया बसन्त

आगया बसन्त छाई मौसमे बहार है 

बुलबुल ने फ़िर से लगा दी गुहार है 

सर्द हवाओं से  मिल गई  निजात है 

रवि बरसा रहा किरणों की फुहार है।


कलियाँ मुस्कुराने लगीं रौनक़े बहार है 

देखो बसंत आ गया हर तरफ़ पुकार है 

हर चेहरा खिल उठा  नज़रों में सिंगार है 

ये है ऐसी ताज़गी जो सबको दरकार है।


खेतों में पीली सरसों का लग रहा अंबार है 

लगता है जैसे हो रही हो सौने की बौछार है 

मन सभी के पुलकित हैं पाके नया संसार है 

सर्दी की बिदाई पे हर ओर जय जय कार है।


सबको बसंत पंचमी की बधाई 

अजित सम्बोधि 

Wednesday, January 21, 2026

जनम दिन मुबारक हो

 जन्म दिन  मुबारक  हो दिव्या तुमको 

ख़ुशियों का अम्बार मिल जाये तुमको 

वक़्त की मेहरबानियाँ ऐसी हों तुम पर 

बख़्शिश ए रब सब मिल जाँय तुमको!


 ये जो ज़िन्दगी मिली है, है बड़ी सौगात 

हर रोज़ सूरज की किरणें लातीं हैं प्रभात 

हर रोज़ एक नई ज़िन्दगी मिलती है हमको 

ये प्रभात है याकि तवील ए उम्र की बारात?


ख़ुशियाँ तुम्हारी होती हैं ख़ुशियाँ हमारी भी 

टकराके तुमसे, वो आतीं जानिब हमारी भी 

ये प्रभात की खुशियाँ तुमको सजाया करें 

ताकि चेहरा तुम्हारा मुस्कुराना न भूले कभी!


बख्शिश ए रब = god’s gift. सौगात = gift.

तवील ए उम्र = उम्र की लम्बाई।जानिब = दिशा में।


सदा मुस्कुराती रहो बिटिया 

पापा 

Thursday, January 1, 2026

नये साल का गीत

 नया साल आ रहा हैं नए सपने ला रहा है 

नई उड़ानें भरने को, नया जज़्बा ला रहा है।


मालिक ने है बख्शा हमको, इतना बड़ा जहाँ 

ज़मीं से लेके फ़लक तक क्या कुछ नहीं यहाँ 

सुबह कली मुस्कुराती, शाम में तारे जगमगाते 

क्यों ना कर लें हम इबादत, मेरा मन कह रहा है।


कभी चाँद झुरमुट की ओट से, कैसा झाँकता है 

कभी सूरज बादलों में से, अकस्मात  झाँकता है 

सब कुछ जो हो रहा है, कितना सुहाना लगता है 

हम पर रब कितनी रहनुमाई, हरदम  कर  रहा है।


जो कुछ बाहर हम देखते वो अंदर का अक्स है 

कभी अंदर में तो झाँकना, कैसा हो रहा रक़्स है 

 अब के नये दिन पर पलकों को गिरा के रखना 

फ़िर देखना पर्दे के पीछे कैसा कमाल हो रहा है।


फलक = आसमान।जज़्बा = कुछ कर गुज़रने का जोश।

रब = ईश्वर। अक्स = reflection. रक़्स = dance.


सब को नये साल की शुभ कामनायें 

अजित सम्बोधि 

Friday, December 26, 2025

वृंदावन की गलियों में

 ये जो मैं आज यहाँ चल रहा हूँ, ये जादू से भरी गलियाँ हैं 

ज़र्रे ज़र्रे में लिपटी हुई, यहाँ पर मुरलीधर की पगथलियाँ हैं।


ये वृन्दावन की गलियाँ हैं जहाँ जुटा करतीं थीं सहेलियाँ हैं 

कान्हा की बाँसुरी की धुन पर यहाँ, थिरकतीं थीं गोपियाँ हैं।


ये जो कदम्ब का पेड़ है, इस पर झूला करते थे, कन्हैया हैं 

साथ में उनके झूलती थीं राधा जी, होती थीं गल बहियाँ हैं।


आज हम पहुँच गये हैं रमण रेती में, लेते हैं इसकी बलैयाँ हैं 

हाँ हाँ यही तो वो रेती है जहाँ कभी करते थे रमण कन्हैया हैं।


यहाँ जमुना बह रही हैं, किनारे पर जो दिख रहीं चमेलियाँ हैं 

वो तुम्हारी याद में गोपाल, अब भी सिसकती कुंज गलियाँ हैं।


तुम जो गये लौट के न आये श्याम, राह देखती रहीं अखियाँ हैं 

तुम्हारे गीता के वायदे को याद कर कर, गुज़ारतीं  तन्हाईयाँ हैं।


यहाँ पर आने पर पाया मैंने, हर सिम्त, यादों की परछाइयाँ हैं 

हर तरुवर की कलियों की ज़ुबाँ पर, बस तुम्हारी कहानियाँ हैं।


हर एक ज़ुबाँ पर तुम हो, तुम्हें देखने को तरस रहीं पुतलियाँ हैं 

घनश्याम बहुत देर हो चुकी है, अब और न बुझाना पहेलियाँ हैं।


पर कैसे भूलूँ कि घनश्याम से तुम ही कराते हो मेरी गलबहियाँ हैं 

तुमने अपना नाम-रूप मुझे दे कर, शुरू से किया करम कन्हैया है।


ये  जो मैं  आज  यहाँ  चल  रहा  हूँ, ये  जादू  से  भरी  गलियाँ  हैं 

ज़र्रे  ज़र्रे  में  लिपटी  हुई, यहाँ  पर  मुरलीधर  की  पगथलियाँ  हैं।


मुरीद ए मुरारी 

अजित सम्बोधि 

Friday, December 5, 2025

एक गुज़ारिश है

 मुझे कुछ कर तो लेने दो 

मुझे यूँ लुटने भी तो दो 

तुम तो हो ग़ैबी हाँ 

हाँ तुम तो हो ग़ैबी हाँ 

हाँ हाँ तुम तो हो ग़ैबी कन्हाई 

मुझे भी रूह बनने दो।

मुझे कुछ कर तो लेने दो 

मुझे कुछ लुट तो लेने दो।


 तुम्हें पाने की हसरत में 

मुझे कुछ खो तो लेने दो 

हाँ मुझे कुछ खो तो लेने दो 

ये जिस्म ले लो वापस 

हाँ हाँ इसे ले लो वापस 

मुझे भी रूह बनने दो 

या तो तुम जिस्म लेके आओ 

वरना मुझे भी रूह बनने दो।

मुझे कुछ कर तो लेने दो 

मुझे यूँ लुटने भी तो दो 

तुम तो हो ग़ैबी कन्हाई 

मुझे भी रूह बनने दो।


कितने सावन बीत गये 

पर तुम फ़िर भी नहीं आये 

आँखें सावन बन बन हारीं 

झूले सूने सूने रह गये 

मैं बन गया यायावर 

तुम तो रहे ग़ैबी 

मुझे आश्कारा बना दिया 

हटा लो ये जिस्मानी चादर 

मुझे अब रूह बनने दो 

मुझे अब रूह बनने दो।


ग़ैबी = invisible. यायावर = फक्कड़।

आश्कारा = visible, जिस्मानी।


रहनशीं रहरौ 

अजित सम्बोधि