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Tuesday, August 4, 2026

कुरजाँ

रिमझिम  की  बहारें  हैं 

पानी   की   फुहारें    हैं 

आसमान  में देखो देखो 

कुरजाँ  की   कतारें   हैं।


ये  दूर  देश  से  आईं  हैं 

पंखों   के  बल  आईं  हैं 

आसमान में उड़ उड़ कर 

खुशियाँ  लेकर  आईं  हैं!


खींचन गाँव खींच के लाया 

साइबेरिया से उनको लाया 

खींचन का ये  प्यारा रिश्ता 

कुरजाँ को भी ख़ूब सुहाया।


हर बरस यहाँ वो आती हैं 

छह महीने  रुक  जाती हैं 

उड़ उड़ कर गीत सुनाती हैं 

हँसती    और   हँसाती   हैं!


कुरजाँ = demoiselle cranes.

खींचन = राजस्थान में जैसलमेर जिले का गाँव।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

Friday, July 31, 2026

क्यों ख़ुद को तुझ पे मिटा न दूँ?

ये ज़िन्दगी मुझे बख़्श दी 

मैं क्यों न रब को दाद दूँ?

कोई मुस्कुरा के बोल दे

मैं क्यों न खुशियाँ बाँट दूँ?

सावन की झड़ी देख के 

मन करता झूले डाल दूँ?

तुम झूलना झूला करो 

मैं क्यों न तुमको पेंग दूँ?

वो उड़ के आईं बुलबुलें 

मैं क्यों न इनको पनाह दूँ?

ये  अपनापन  दर्शा  रहीं 

दानों की कुछ सौगात दूँ।

पूनम का चाँद खिल उठा 

नौशाद हो, कहो बोल दूँ?

ऐ ज़िन्दगी, तूने सब कुछ दिया 

क्यों ख़ुदको तुझपे मिटा न दूँ?


रब = ईश।दाद = सराहना।नौशाद = सुन्दर।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

Sunday, July 26, 2026

जुगलबंदी

                        ,  [1]


नफ़रत से अनजान बस, मोहब्बत का सुकून चाहिये 

न मज़हब, न जात, न वतन, एक अदद इंसान चाहिये।


जब परिन्दे सरहदें पार करते हैं, क्या वतन बताते हैं 

जब बादल गरजते आते हैं, क्या मज़हब बखानते है।


इन्सान को ही इतना नाकारा क्यों बना दिया गया है 

उसके ख़िलाफ़ नाइन्साफ़ी को जायज़ किया गया है।


क़ुदरत ने तो बख़्शी हें इतनी इनायतें वो भी मुफ़्त में 

इन्सान कैसे कंजूस हो गया, इतनी सारी इफ़रात में।


उसने तो हवा पानी ज़मीन सूरज सब मुफ्त में दिये हैं 

आपकी ग़लतफ़हमी ने सोचिये कितने उत्पात किये हैं? 


आपने क्या बनाया है जो हक़ की बात किया करते हैं 

सोचिये क्या आप घास का एक पत्ता भी बना सकते हैं? 

 

नाकारा = निकम्मा।इनायत= कृपा।. इफ़रात = बहुतायत।

 ग़लतफ़हमी = भ्रम।


                              .[2]


उम्मीद है कि फ़ासला कम कर देती है 

मगर ग़लतफ़हमी दूरियाँ बढ़ा देती है।


इस ज़ुबान को कभी हल्के में मत ले लेना 

कभी कभी इसमें पड़ जाता है लेने का देना।


ये हल्की है मगर कभी भारी पड़ सकती है 

क्योंकि कही बात वापस नहीं आ सकती है।


साथ निभाने के लिये सावधानियाँ दरकार है 

मगर जुदा होने में एक ग़लती भी असरदार है।


आप अपना किरदार बखूबी निभाते रहिये 

बस इस ज़ुबान को नजरंदाज मत करिये।


किरदार = role. नजरंदाज = ignore.


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

Friday, July 24, 2026

ले चलो!

कहाँ से लाऊँ मैं प्यार ऐसा 
क़बूल जिसको तुम कर सको
क्या दिल में वितान है ऐसा 
बिठा के मुझको तुम ले चलो ।

मेरा जहाँ तो है बस तुम्हीं से 
तुम्हीं से बाँधा है डोर को 
अगर जो मेरी फ़िक्र है तुमको 
मुझे भी अपने संग ले चलो ।

दिखें कभी जो नम आँखें मेरी  
अर्क़ समझ लेना तुम नमी को
अगर जो आँखों में दर्द झलके 
अपना समझ के घर ले चलो ।

अगर जो कहना मुमकिन न हो
काफ़ी है जो होठों को हिला दो 
मैं मान लूँगा तुम कह रहे हो
तुम्हीं मुझे  अब घर  ले चलो ।

वितान = विस्तार।अर्क़ = पसीना।

ओम् शान्ति:
अजित सम्बोधि।

Thursday, July 9, 2026

Divya is coming!

 My daughter is coming all the way

Flying over bays and oceans, to say

Hallo to me, her dad, old and alone!

When was it we joined hands to play?


She is my youngest daughter, sparky

Vivacious, playful, kinetic and perky!

She brings cheer to every ailing heart

I am eager to see you again, chirrupy!


Here flies a dove from the jamun tree

Squats on the railing, quite near to me.

She is silent, steady, and now, reposed! 

What makes it sit so securely, near me?


Can one deny an invisible link of love

That binds all creation, in cosmic love?

State of satori shows us that all creation 

Is but consciousness, pulsating, in love!


Welcome my dear child!

Waiting eagerly for you!

Papa

Tuesday, June 16, 2026

गीत गाता रहूँगा!

गीत गाता रहूँगा, मैं तुमको मनाता रहूँगा,  सदा ही
तुम मानो न मानो, इबादत मैं करता रहूँगा, सदा ही।

इबादत कोई कुमकुमा तो नहीं, खेलने के लिए
इबादत कोई वसवसा तो नहीं, भूलने के लिए
इबादत है इंसा की शाइस्तगी, तवज्जुन के लिए
इबादत है इंसा की फ़र्ज़ानगी, तवज्जोह के लिए
मैं गाता रहूँगा याद तुमको दिलाता रहूँगा, सदा ही
सुनोगे इबादत की बाबत बताता रहूँगा, सदा ही।

फ़िक्र मुझको नहीं वक्त की, हूँ न पाबंद मैं वक्त का
मिटता नहीं मैं कभी, हूँ न फ़रजन्द मैं वक्त का
निहायत ही फ़ुरसत तलब फ़लसफ़ा है ये इबादत 
निहायत ही शायराना ज़लज़ला है ये इबादत 
ज़ुलेख़ा और यूसुफ़ रहे हैं ज़माँ में, रहते रहेंगे सदा ही
मैं उनके तराने गाता रहा हूँ, गाता रहूँगा सदा ही।

उल्फ़त के बने अफ़साने ज़माँ में, बनते रहेंगे, सदा ही
दिवाने मगर रहते फ़ितरते दम पर, रहते रहेंगे, सदा ही
ख़ामियाज़ा अगर जो भुगतना है, भुगता करेंगे, सदा ही
मगर दिल की आवाज़ पहिचानते हें, माना करेंगे, सदा ही
सताओ बेफ़िक्र होकर सताओ, सहता रहूँगा, सदा ही
बुलबुला हूँ मैं, आता रहूँगा, जाता रहूँगा, सदा ही।

दरख़्त लहराऐं, हवाऐं सरसराऐं, कुछ तो है इनके परे
बुलबुलें गाऐं, मौजें गुनगुनाऐं, कुछ तो है इनके परे
नूरपाशी कर रहा है चाँद, कुछ तो है इसके परे
तेरे मेरे दरमियाँ ख़ामोशियाँ कुछ तो है इनके परे
ये नग़मे मेरे हें, तेरे माहरू, रहते रहेंगे सदा ही
गुनगुनाते हो अब भी, वही गुनगुनाया करोगे, सदा ही।

रक़ीबो उठाना न ज़हमत पहुँचना है दुश्वार उस तक
लौटते हैं नहीं वो जो इक बार जा पहुँचते हैं, उस तक
दरख़्शाँ है  आलम वहाँ का, वो है ख़ालिक वहाँ की
चश्मे बातिन दिखायेगी नूरी मलबूस उसकी
उसी के ख़्वास्ता नग़मे गाता हूँ गाता रहूँगा सदा ही
वो ही सिखाती लुका छुपी, खेलता रहूँगा सदा ही।

गीत गाता रहूँगा, मैं तुमको मनाता रहूँगा, सदा ही 
तुम मानो न मानो, इबादत मैं करता रहूँगा सदा ही।

इबादत = प्रार्थना। कुमकुमा = खिलौना।
वसवसा = वहम।शाइस्तगी = शिष्टता।तवज्जुन = balance.
फ़र्ज़ानगी = बुद्धिमता।तवज्जोह = care . फ़रज़ंद = उत्तराधिकारी।
फ़ुर्सत तलब फ़लसफ़ा = relaxing ideology.शायराना ज़लज़ला =
poetic quake. ज़ुलेख़ा और यूसुफ़ = सूफ़ी राधा और कृष्ण।
उल्फ़त = प्यार। अफ़साने = किस्से।ज़माँ = ज़माना।फ़ितरते दम पर =
अपनी nature के हिसाब से।ख़ामियाज़ा = नुक़सान।दरख़्त = पेड़।
मौजें = लहरें।नूरपाशी = रौशनी बखेरना।नग़मे = गीत।माहरू=चंद्र प्रभा।
रक़ीबो = competitors. ज़हमत = झंझट।दुश्वार = मुश्किल।दरख़्शाँ =
प्रकाश से भरा।आलम = माहौल।ख़ालिक़ = creatrix. चश्मे बातिन =
inner eye. नूरी मलबूस = रौशनी की पोशाक।ख़्वास्ता = लिये।

जय माँ राधे 
अजित सम्बोधि।

Friday, June 12, 2026

बादल से बरसते हें आँसू।

बादल  से बरसते  हें  आँसू

गीले   से    रहते   हें    गेसू

इस मोड़ के   आने  पर  तो 

दिल बिखरा  रहता है  हरसू  ।  


वो काली सी घटा इक छाई है

और  शाम  में  फ़िर  तन्हाई है 

तूफ़ान  के  अंदेशों  में  बरबस 

सब  ओर   ख़ामोशी   छाई  है ।


सुनसान निगाहों की चितवन 

सुनसान क़ल्ब की है धड़कन 

आकाश  में   पँछी  उड़ता  है 

मानो  सुनसान  हुआ  उपवन ।


इज़हारे   तमन्ना   करने   से 

ख़्यालात  बज़ाहिर करने से 

हालात बदल  नहीं  जाते  हें 

मासूमी  इबादत   करने   से ।


ख़्यालात  तभी तो  आते हें 

जब  ख़्वाब अधूरे  रहते  हें 

जब घुटन सी होने लगती है

वो सिराज बने, चले आते हें । 


गेसू = बाल।हरसू=हर तरफ़। क़ल्ब=दिल।

इज़हारे तमन्ना = इच्छा का बताना। 

बज़ाहिर = ज़ाहिर करना। सिराज=रोशनी।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि।