Thursday, April 9, 2026
नाचना
Tuesday, April 7, 2026
Happy birthday Alok!
Wish you a happy birthday Alok!
You’re light, you know well Alok.
Yours is daylight, called Divalok
No one can live sans light, Alok!
There’s a cousin of Divalok, Alok
It’s divine, and is named Chidalok.
Few people aspire to reach out to it
It is as variegated as Divalok, Alok.
Both the lights derive from Mahalok
They’re like two sides of a coin, Alok
As Divalok covers the physical aspect
Chidalok woos the metaphysical, Alok!
Thanks Alok for your meaningful name
Which took me along and started a game!
I played and played while lolling around
Bidding happy birthday was my only aim!
Happy Birthday!
Ajit Sambodhi
Wednesday, April 1, 2026
चैत्र पूनम
मैं अभी देख रहा हूँ आसमान को
घुमड़ती घटाओं के करिश्मों को
उनमें डूबते हुए अथक दिनकर को
और उभरते हुए सम्पूर्ण चन्द्रमा को!
हाँ आज पूर्णिमा का चाँद निकला है
गोल थाल जैसा बड़ा चाँद निकला है
आख़िर प्रथम माह चैत्र का चाँद जो है
अंजनि पुत्र हनुमान के लिए निकला है!
आज संकटमोचन हनुमान का जन्मदिन है
आज बजरंगबली कपीश्वर का जन्मदिन है
हाँ आज लक्ष्मणप्राणदाता का जन्मदिन है
आज सीताशोकविनाशक का जन्मदिन है!
केसरीनंदन महाबली हनुमान के चरणों में नतमस्तक
अजित सम्बोधि
Monday, March 30, 2026
पचपन वर्ष पूर्व
बच्चे परिंदों की तरह उड़ जाते हैं बड़े होने पर
कुछ यादें छोड़ जाते हैं, याद करने को उम्र भर
जया, मुझे याद है पचपन वर्ष पूर्व का वो दिन
जब तुम्हें देखा था पहली बार अपने अंक में भर।
सूरज की पहली पहली किरण तुम्हें छू रही थी
चाँदनी उचक उचक के तुमको पुचकार रही थी
तुम अपनी माँ की गोदी में दुबक के सो रही थीं
कभी मुस्कुरा देती थीं मानो सपना देख रही थीं।
मैं बीते हुए लमहों को याद कर कर रोता नहीं हूँ
मैं उनको याद कर के ज़ोरों से हँसता भी नहीं हूँ
ये यादें तो ज़िंदगी भर की अमानत हुआ करती हैं
इसलिए मैं इन्हें याद कर कर के जिया करता हूँ।
तुम्हें बिटिया आज मुबारक हो तुम्हारा ये जन्म दिन
मैं ख़ुशनसीब हूँ देख पा रहा हूँ तुम्हारा ये जन्म दिन
रब से इल्तिज़ा है बख़्शा करे इसी मानिंद जन्म दिन
ताकि तुम मनाती रहो ख़ुश ख़ुश अपना ये जन्म दिन!
परिंदों/परिंदे = birds. अंक = गोद।
लमहों/लमहे = moments.अमानत = धरोहर।
रब = ख़ुदा।इल्तिज़ा = दुआ।मानिंद = मुताबिक।
राधे रानी की कृपा बनी रहे तुम पर सदा
पापा
Sunday, March 22, 2026
वो 22 मार्च
मुश्किल है बहुत मुश्किल यादों को भुला देना
आसान नहीं है जुदाई को दिल से बिदाई देना
जन्मों की मुरव्वत से, मिल पाती है ऐसी निस्बत
आसान नहीं है कुदरत की बेरुख़ी को भुला देना।
घर तो वही है न, जहाँ कोई इंतिज़ार में बैठा हो
तभी न पैर मुड़ते घरको, जब यादमें कोई बैठा हो
पड़ते हैं क़दम मेरे अब जहाँ वो घर नहीं मकान है
कैसा लगेगा वो सूना मंज़र जहाँ सन्नाटा बैठा हो?
एक वो भी दिन था जब माँ इन्तिज़ार कर रही थीं
और मैंने बाअदब, उनके हुक्म की तामील की थी
एक घूँघट ने उनके आँगन का, सूनापन समेटा था
और हवा की सरसराहट में स्वर लहरी तैर गई थी।
मुरव्वत = लगाव।निस्बत = relationship.मंज़र = दृश्य।
बाअदब = आदरपूर्वक।तामील = अनुपालन।
ये सूना मंज़र और मैं
अजित सम्बोधि
Tuesday, March 17, 2026
कितना कमाऊँ?
एक ही सवाल है ज़ेहन में, पूछने के लिये
कितना कमाऊँ, ख़ाली हाथ जाने के लिये?
…..
सिकन्दर को जाना था जीतने के लिये
दुनियाँ, गया अरस्तू से मिलने के लिये।
अरस्तू ने दुआयें दीं उसके भले के लिये
भेजा…डायोज़िनीज़ से मिलने के लिये।
….
डायोज़नीज़ ने पूछा कहाँ को चल दिये
सिकन्दर ने कहा, दुनियाँ जीतने के लिये।
अच्छा दुनियाँ जीतोगे, मगर किसके लिये
सोचा नहीं…शायद आराम करने के लिये।
अरे अरे इतनी मेहनत करोगे..इस के लिये
आजा आजा मेरी झोंपड़ी है…इस के लिये!
….
दुनियाँ जीत ली, जा रहा हूँ, ख़ाली हाथ लिये
डायोज़िनीज़ तुमने सही पूछा था, किसके लिये।
…..
जो सिकन्दर ने कहा उस दिन, सही है मेरे लिये
मुझे जवाब मिल गया मन पसन्द आज मेरे लिये।
ओम शान्ति:
अजित सम्बोधि
