Monday, September 28, 2026
बिटियाओं का दिन
नाम ए लख़्त ए जिगर
गुले सुर्ख़ हो तुम, गुले जाफ़री
मेरी गुंचा हो तुम, मेरी शायरी
लख़्त ए जिगर हो मेरी लाड़ली
तुम्हीं से सजी है मेरी फुलवारी
अगर कोई तुमको हटाये डगर से
अगर कोई तुमको गिराये नज़र से
न आँसू बहाना न दिल को दुखाना
चमनआरा तेरा, मुझे याद करना।
गुलूसोज़ हो, मेरी गुलरोज़ हो
गुल्फ़िशाँ हो, सरफ़राज़ हो
सहरा में सहारा, हमराज़ हो
तुम ही तो मेरी इम्तियाज़ हो
अगर कोई तुमसे हटा ले सिपर
अपना कोई तुमसे जुदा हो जिगर
न आँसू बहाना, न दिल को दुखाना
बागबाँ हूँ तिरा, मुझे याद करना।
मेरी जुस्तजू हो, मेरी रग ए गुलू हो
मेरी आरज़ू हो, मेरी ख़ुशगुलू हो
तिशनगी बुझाने तिशनागुलू की
गुलशन में बहती एक गुलूल हो
अगर कोई वादे से जाये मुकर
अगर कोई अपने से छोड़े सफ़र
न आँसू बहाना, न दिल को दुखाना
गुलचीं हूँ तेरा, मुझे याद करना।
गोदी में तुमको खिलाया है मैंने
कंधे से तुमको लगाया है मैंने
लोरी सुनाके सुलाया है मैंने
अश्कों को तेरे पोंछा है मैंने
अगर कोई कभी भी तुमको रुलाये
ज़रे जाफ़री की जमैयत मिटाये
न अश्कों को पीना, न जी को दुखाना
अब्बू हूँ तेरा, तू मुझको बताना।
गुले सुर्ख़ = गुलाब का फूल। गुले जाफ़री = केसर का फूल।
गुंचा = कलिका। लख़्त ए जिगर = जिगर का टुकड़ा।
चमनआरा = बाग़बान।गुलूसोज़ = गुलरोज़ = फुलझड़ी।
गुल्फ़िशाँ = रोशन झड़ी। सरफ़राज़ = ऊँचे सर वाली।
सहरा = desert devoid of oases. हमराज़ = राज़दार।
इम्तियाज़ = पहचान। सिपर = सुरक्षा कवच।
जुस्तजू = तलाश।रग ए गुलू = सबसे मुख्य नाड़ी।
आरज़ू = मिन्नत। ख़ुशगुलू = dulcet throated.
तिशनगी = प्यास।तिशनागुलू = प्यासा।गुलशन = बाग़।
गुलूल = streamlet meandering through trees.
ग़ुलचीं = nursery man.अश्कों = आँसुओं।
ज़रे जाफ़री = खरा सोना।जमैयत = status.अब्बू = पिता।
आमीन = so be it! a prayer to the almighty!
आमीन
अजित सम्बोधि
Saturday, September 26, 2026
प्रज्ञा का जन्म दिन
जनम दिन मुबारक हो तुमको प्रज्ञा
एक बात बता दूँ मैं तुमको प्रज्ञा
प्रज्ञा की कभी नहीं होती है अवज्ञा
सबको प्रज्ञा से लेनी होती है अनुज्ञा।
बधाई हो तुमको तुम्हारे नाम पर
तुम्हें नहीं करना कोई काम डर कर
तुम्हारा जो है वो सुन्दर आशियाना
वही रहेगा तुम्हारा दिलकुशा उम्र भर।
नहीं भूल सकता वक़्त जो गुज़रा वहाँ
मेरी खिड़की से चाँद दिखता था वहाँ
कई घंटे का साथ देता था मुझको वो
सटोरी होती थी उसकी चाँदनी में वहाँ।
मैपल का पेड़ भी था मेरा एक साथी वहाँ
मैं उसकी छाँव में अक्सर बैठता था वहाँ
रोबिन, रैन, फ़िंच, चिकेडी आती थीं वहाँ
मैं उनको दाना पानी दिया करता था वहाँ।
प्रज्ञा = अंतर्दृष्टि।अवज्ञा = अवहेलना।
अनुज्ञा = अनुमति।आशियाना = घर।
दिलकुशा = दिल को ख़ुशी देने वाला।
सटोरी = समाधि की एक अवस्था।
जय राधे राधे
पापा
Monday, September 14, 2026
एक वो ज़माना था
एक वो ज़माना था हाँ एक वो ज़माना था
जो कभी मेरी आँखों में बसा परवाना था
जिधर नज़र घुमाता उधर ही अफ़साना था
आँखे बन्द कर लेता तो वो भी नज़राना था।
छोटी सी आँख में समाया सारा ज़माना था
कभी तितलियाँ पकड़ने में टकटकाना था
कभी खिसिया के आँख का मिचमिचाना था
कभी दौड़ लगाते इंजिन का छुकछुकाना था।
कभी तमन्ना होती कि चाँद को पकड़ लूँ मैं
फ़िर उसको बाहों में भर के उससे ये पूछूँ मैं
तुम इतने जमील हो मगर इतने दूर क्यों हो
क्या ये मुमकिन नहीं तुम्हारे पास रह सकूँ मैं?
मैं उसे अपनी आँखों में भर लिया करता था
आँखें बन्द करने पे वो मुझे दिखा करता था
वो मुझको पसन्द था और मैं उसे पसन्द था
वो मुझसे मेरी नींद में बातें किया करता था।
कभी बारिश बरसती तो मैं थिरकने लगता था
काग़ज़ की कश्ती बरसते पानी में चलाता था
क्या दिन थे ये खेल मेरी जागीर हुआ करते थे
यही वक़्त था जो मेरा बचपन हुआ करता था!
वो बचपन का ज़माना भी कैसा सुहाना होता था
किसी फ़िक्र से कभी कहीं मिलना नहीं होता था
परियों की किताबों में परियों से मिलना होता था
फ़िर माँ की गोदी में आख़िरी ठिकाना होता था।
अफ़साना = क़िस्सा।नज़राना = gift.
तमन्ना = इच्छा।जमील = अति सुंदर।
ओम् शान्ति:
अजित सम्बोधि
जिस दिन
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
यूँ ही नहीं मैंने अब तक गुज़ारे हैं दिन
नहीं लेता हूँ साँस तुझे याद किये बिन
मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा
मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
रात भर दिया जला करता है तेरे लिए
ओस बनके टपकती हैं आँखें तेरे लिए
याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?
याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
ये मेरी कश्ती है और ये जल की धारा
नज़र आता नहीं है दूर तलक किनारा
पता नहीं कितनी बार लगाना है फेरा?
पता नहीं कितनी बार लगाना है फेरा ?
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
देखो आसमान को छूती हुई पहाड़ियाँ
और धीरे धीरे रेंगती हुई ये पगडण्डियाँ
चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा
चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
उज़्र = एतिराज़। ग़र = यदि। दीदार = मुलाकात।
क़दमबोस = आदर पूर्वक चरण स्पर्श करने वाला।
क़दमबोस
अजित सम्बोधि
Tuesday, August 18, 2026
महकती अरावली
ख़ुशनुमा यहाँ का जंगल है
हर तरफ़ यहाँ पर मंगल है
सब कुछ कितना सुन्दर है
नहीं यहाँ कोई दंगल है।
इधर लोकियाँ लटक रहीं हैं
उधर शरीफ़े महक रहे हैं
केले नहीं अकेले, हैं अलबेले
गुच्छे बन बन ललक रहे हैं।
हर तरफ़ पहाड़ियाँ बिखरी हैं
और आसमान में छितरी हैं
दिलवाली, सबको बुलाती हैं
प्यार में ख़ुद भी थिरकती हैं।
करुणामय धरती दीप्त यहाँ
आकाश भी रहता सु-नील यहाँ
मन को हर्षाती हरियाली यहाँ
फ़िर क्यों न लगे मन मेरा यहाँ।
जय राधे राधे
अजित सम्बोधि
Friday, August 14, 2026
लख़्त ए जिगर
जिससे दिल मिला था वो चला गया साहब
अब बेदिली से यहाँ पे रहने का क्या मतलब?
क्या करूँगा मैं ज़माने भर की ख़ुशियाँ पाकर
मुझे पता है वो न आयेगा अब कभी लौट कर।
हाँ, बख़ूबी जानता हूँ मैं होश में रहने का जुनून
सब्र जब टूटता है होश रखना होता नामुमकिन।
क्या करूँगा इस दुनिया से मुख़ातिब होकर फ़िर
उसका सलीक़ा तो न लौट के आयेगा कभी फ़िर।
बहुत कुछ दफ़्न है अंदर फ़िर भी मुस्कुरा देता हूँ
आँसू बन के टपके, उससे पहिले मुस्कुरा देता हूँ।
हक़ीक़त को तो रेत की तरह उड़ा नहीं सकता हूँ
हाँ, ख़ामोशी की एक रिदा ज़रूर उढ़ा सकता हूँ।
मेरी खामोशी को समझना, मुश्किल बात नहीं है
मेरी ज़ुबान में बोलिये, मुझे बोलने में उज़्र नहीं है।
मैं भी तो वक़्त का पाबंद हूँ, ढल जाऊँगा एक दिन
ये हक़ीक़त है, इसे बख़ूबी याद रखता हूँ, हर दिन!
बेदिली = बेमन।जुनून = लगन।नामुमकिन = असंभव।
मुख़ातिब = मुँह सामने बात करना।रिदा = चादर।उज़्र = आपत्ति।
जय राधे राधे
अजित सम्बोधि
Wednesday, August 12, 2026
हरियाली अमावस्या।
ये हरियाली अमावस्या है
पीपल पूजन ही तपस्या है
मत घबराना बिल्कुल भी
दूर भागेगी हर समस्या है!
ये सावन की अति प्यारी है
और शिव की राज दुलारी है
बीच खड़ी भरे सावन में
चहुँ और छटा में न्यारी है!
हर ओर झुकी हरियाली है
हर तरफ़ छटा मतवाली है
सावन की फुहारें झरती हैं
कोयल की गूँज निराली है!
घनघोर घटा घिर आई है
मन-मोरनी नाचने आई है
हर शाख़ बनी रक़्क़ासा है
क़िस्मत की देखो दुहाई है!
दिन बना था आज सुरमई है
और शाम हो रही कोकई है
मै सुनता गुंजन मधुर मधुर
और समाँ हो गया गौनई है।
रक़्क़ासा = dancer. दुहाई = पुकार।
सुरमई = सलेटी।कोकई = लालिमा मय।
गौनई = संगीत मय।
जय राधे राधे
अजित सम्बोधि
Tuesday, August 4, 2026
कुरजाँ
रिमझिम की बहारें हैं
पानी की फुहारें हैं
आसमान में देखो देखो
कुरजाँ की कतारें हैं।
ये दूर देश से आईं हैं
पंखों के बल आईं हैं
आसमान में उड़ उड़ कर
खुशियाँ लेकर आईं हैं!
खींचन गाँव खींच के लाया
साइबेरिया से उनको लाया
खींचन का ये प्यारा रिश्ता
कुरजाँ को भी ख़ूब सुहाया।
हर बरस यहाँ वो आती हैं
छह महीने रुक के जाती हैं
उड़ उड़ कर पंख दिखाती हैं
किलक किलक कर गाती हैं।
कुरजाँ = demoiselle cranes.
खींचन = राजस्थान में जैसलमेर जिले का गाँव।
जय राधे राधे
अजित सम्बोधि
