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Monday, April 13, 2026

Hi Akshat

Hi Akshat, happy birthday to you 

Today I wish Shelly’s lark to you!


Listen young man, let the time bark

You listen only to Shelley s skylark!

You’re no Time’s Fool, ye know well 

Even sans pining, U can make a mark!


The great blue’s deep is mesmerising 

It’s full of tales absolutely fantasizing 

Shelly’s skylark is live &  picturesque 

Let mortals dream, song is tantalising!


Thanks for listening to me for so long 

I have tried to make my living a song

I wish again a happy birthday to you 

Let the lark turn your life into a song!


Happy Birthday 

Nana

Sunday, April 12, 2026

जंगबाज़ या बल्लेबाज़?

 हम जंगबाज़, जंगबाज़ी हमारा इक़राम है 

जंगआज़माई से ही तो मिलता एहतराम है 

जब तक न जंग हो, हमें मिलता नहीं चैन है 

धरती सुधार दी अब चाँद अगला मुक़ाम है।


देखिए कोई जंगबाज़ हो या कि कबूतरबाज़ 

चाहे वो तीरंदाज़ हो या फिर बड़ा तीतरबाज़ 

ये बाज़ियाँ जानलेवा हैं कैसे करें नज़रअंदाज़?

कोई समझाये कि क्यों नहीं बनते पतंगबाज़?


बाज़ी पसंदगी है तो बन जाइये दिल्लग़ीबाज़ 

या तमाशेबाज़ , या जल्दबाज़ी का कलाबाज़ 

हेकड़ीबाज़ मत बनिये, बड़ी नुकसानदायक है 

नाम कमाना चाहते हैं तो बन जाइये बल्लेबाज़!


जंगबाज़ = लड़ाका।इकराम = इनाम। 

एहतराम = आदर।मुक़ाम = पड़ाव।

नज़रअंदाज़ = जिस पर ध्यान न दिया गया।


ओम शान्ति:

अजित सम्बोधि 

Thursday, April 9, 2026

नाचना

ये धरती नाचती, माहताब नाचता है 
सितारे नाचते और फ़लक नाचता है 
ये कौन है जो मेरे, दिल में आगया है 
बना के जोड़ी वो, मेरे  संग नाचता है।

ये ना समझना ये कोई और नाचता है 
भोला सा बनके जो  हरदम नाचता है 
ये तो वही  है जो  सबको नचा रहा है 
ये ही  तो  है जो  मेरे  संग  नाचता  है।

सुनो नाचना ख़ुद ब ख़ुद होता रहता है 
जब भी दिल चाहता, ये होने लगता है 
मैं दिल से कहता हूँ फ़ुर्सत में नाचा कर 
वो बोला फुर्सत का किसे ध्यान रहता है!

अब कैसे बताऊँ मैं कि वो कैसे नाचता है 
सच कहूँ, वो अब्र ए नूर हो हो नाचता है 
जब भी आप नाचें , ज़रा ग़ौर कर लेना
येकि आप नाचते हैं याकि वो नचाता है।

माहताब = चाँद। फ़लक = आसमान।
अब्र ए नूर = प्रकाश का बादल।

ओम् शान्ति: 
अजित सम्बोधि।

Tuesday, April 7, 2026

Happy birthday Alok!

Wish you a happy birthday Alok!

You’re light, you know well Alok.

Yours is daylight, called Divalok 

No one can live sans light, Alok!


There’s a cousin of Divalok, Alok 

It’s divine, and is named Chidalok.

Few people aspire to reach out to it 

It is as variegated as Divalok, Alok.


Both the lights derive from Mahalok 

They’re like two sides of a coin, Alok 

As Divalok covers the physical aspect 

Chidalok woos the metaphysical, Alok!


Thanks Alok for your meaningful name

Which took me along and started a game!

I played and played while lolling around 

Bidding happy birthday was my only aim!


Happy Birthday!

Ajit Sambodhi 

Wednesday, April 1, 2026

चैत्र पूनम

मैं अभी देख रहा हूँ आसमान को 

घुमड़ती घटाओं के  करिश्मों को 

उनमें डूबते हुए अथक दिनकर को 

और उभरते हुए सम्पूर्ण चन्द्रमा को!


हाँ आज पूर्णिमा का चाँद निकला है 

गोल थाल जैसा बड़ा चाँद निकला है 

आख़िर प्रथम माह चैत्र का चाँद जो है 

अंजनि पुत्र हनुमान के लिए निकला है!


आज संकटमोचन हनुमान का जन्मदिन है 

आज बजरंगबली कपीश्वर का जन्मदिन है 

हाँ आज लक्ष्मणप्राणदाता का जन्मदिन है 

आज सीताशोकविनाशक  का जन्मदिन है!


केसरीनंदन महाबली हनुमान के चरणों में नतमस्तक 

अजित सम्बोधि 

Monday, March 30, 2026

पचपन वर्ष पूर्व

 बच्चे परिंदों की तरह उड़ जाते हैं बड़े होने पर 

कुछ यादें छोड़ जाते हैं, याद करने को उम्र भर 

जया, मुझे याद है पचपन वर्ष पूर्व का वो दिन 

जब तुम्हें देखा था पहली बार अपने अंक में भर।


सूरज की पहली पहली किरण तुम्हें छू रही थी

चाँदनी उचक उचक के तुमको पुचकार रही थी 

तुम अपनी माँ की गोदी में दुबक के सो रही थीं 

कभी मुस्कुरा देती थीं मानो सपना देख रही थीं।


मैं बीते हुए लमहों को याद कर कर रोता नहीं हूँ 

मैं उनको याद कर के ज़ोरों से  हँसता भी नहीं हूँ 

ये यादें तो ज़िंदगी भर की अमानत हुआ करती हैं 

इसलिए मैं इन्हें  याद कर कर के जिया करता हूँ।


तुम्हें बिटिया आज मुबारक हो तुम्हारा ये जन्म दिन 

मैं ख़ुशनसीब हूँ देख पा रहा हूँ तुम्हारा ये जन्म दिन 

रब से इल्तिज़ा है बख़्शा करे इसी मानिंद जन्म दिन 

ताकि तुम मनाती रहो ख़ुश ख़ुश अपना ये जन्म दिन!


परिंदों/परिंदे = birds. अंक = गोद।

लमहों/लमहे = moments.अमानत = धरोहर।

रब = ख़ुदा।इल्तिज़ा = दुआ।मानिंद = मुताबिक।


राधे रानी की कृपा बनी रहे तुम पर सदा 

पापा 

Sunday, March 22, 2026

वो 22 मार्च

मुश्किल है बहुत मुश्किल यादों को भुला देना 

आसान नहीं है जुदाई को दिल से बिदाई देना 

जन्मों की मुरव्वत से, मिल पाती है ऐसी निस्बत 

आसान नहीं है कुदरत की बेरुख़ी को भुला देना। 


घर तो वही है न, जहाँ कोई इंतिज़ार में बैठा हो 

तभी न पैर मुड़ते घरको, जब यादमें कोई बैठा हो 

पड़ते हैं क़दम मेरे अब जहाँ वो घर नहीं मकान है

कैसा लगेगा वो सूना मंज़र जहाँ सन्नाटा बैठा हो?


एक वो भी दिन था जब माँ इन्तिज़ार कर रही थीं 

और मैंने बाअदब, उनके हुक्म की तामील की थी 

एक घूँघट ने उनके आँगन का, सूनापन समेटा था 

और हवा की सरसराहट में स्वर लहरी तैर गई थी।


मुरव्वत = लगाव।निस्बत = relationship.मंज़र = दृश्य।

बाअदब = आदरपूर्वक।तामील = अनुपालन।


ये सूना मंज़र और मैं 

अजित सम्बोधि