साँस लेना तो ज़रूरी होता है
मगर न साँस लेना भी होता है
साँस न लेना ख़ुद ब ख़ुद होता है
जब थोड़ी देर के लिये होता है
वो ख़ुद से मिलना होता है
जब ज़ियादा देर के लिये होता है
वो ख़ुदा से मिलना होता है
है न?
बोलना भी तो ज़रूरी होता है
मगर न बोलना भी होता है
जहाँ इत्मीनान होता है
वहाँ बोलने के बजाय न बोलना
ज़ियादा अच्छा भी होता है
बोलना सीमा बाँध देता है
न बोलना असीमित होता है
है न?
वफ़ात बड़ी वफ़ादार है
वफ़ात न हो तो हयात कैसे हो?
ये एक रोज़ की बाबत नहीं है
हर लम्हे की कहानी है
हर लम्हा स्पंदित है
जीवन का बहाव तरंगित है
बोल के चौपट मत कर देना
बस मुस्कुरा भर देना
है न?
वफ़ात = मृत्यु।वफ़ादार = faithful.हयात = जीवन।
लम्हा = moment. स्पंदित = vibrational.
ओम शान्ति:
अजित सम्बोधि
