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Tuesday, April 7, 2026

Happy birthday Alok!

Wish you a happy birthday Alok!

You’re light, you know well Alok.

Yours is daylight, called Divalok 

No one can live sans light, Alok!


There’s a cousin of Divalok, Alok 

It’s divine, and is named Chidalok.

Few people aspire to reach out to it 

It is as variegated as Divalok, Alok.


Both the lights derive from Mahalok 

They’re like two sides of a coin, Alok 

As Divalok covers the physical aspect 

Chidalok woos the metaphysical, Alok!


Thanks Alok for your meaningful name

Which took me along and started a game!

I played and played while lolling around 

Bidding happy birthday was my only aim!


Happy Birthday!

Ajit Sambodhi 

Wednesday, April 1, 2026

चैत्र पूनम

मैं अभी देख रहा हूँ आसमान को 

घुमड़ती घटाओं के  करिश्मों को 

उनमें डूबते हुए अथक दिनकर को 

और उभरते हुए सम्पूर्ण चन्द्रमा को!


हाँ आज पूर्णिमा का चाँद निकला है 

गोल थाल जैसा बड़ा चाँद निकला है 

आख़िर प्रथम माह चैत्र का चाँद जो है 

अंजनि पुत्र हनुमान के लिए निकला है!


आज संकटमोचन हनुमान का जन्मदिन है 

आज बजरंगबली कपीश्वर का जन्मदिन है 

हाँ आज लक्ष्मणप्राणदाता का जन्मदिन है 

आज सीताशोकविनाशक  का जन्मदिन है!


केसरीनंदन महाबली हनुमान के चरणों में नतमस्तक 

अजित सम्बोधि 

Monday, March 30, 2026

पचपन वर्ष पूर्व

 बच्चे परिंदों की तरह उड़ जाते हैं बड़े होने पर 

कुछ यादें छोड़ जाते हैं, याद करने को उम्र भर 

जया, मुझे याद है पचपन वर्ष पूर्व का वो दिन 

जब तुम्हें देखा था पहली बार अपने अंक में भर।


सूरज की पहली पहली किरण तुम्हें छू रही थी

चाँदनी उचक उचक के तुमको पुचकार रही थी 

तुम अपनी माँ की गोदी में दुबक के सो रही थीं 

कभी मुस्कुरा देती थीं मानो सपना देख रही थीं।


मैं बीते हुए लमहों को याद कर कर रोता नहीं हूँ 

मैं उनको याद कर के ज़ोरों से  हँसता भी नहीं हूँ 

ये यादें तो ज़िंदगी भर की अमानत हुआ करती हैं 

इसलिए मैं इन्हें  याद कर कर के जिया करता हूँ।


तुम्हें बिटिया आज मुबारक हो तुम्हारा ये जन्म दिन 

मैं ख़ुशनसीब हूँ देख पा रहा हूँ तुम्हारा ये जन्म दिन 

रब से इल्तिज़ा है बख़्शा करे इसी मानिंद जन्म दिन 

ताकि तुम मनाती रहो ख़ुश ख़ुश अपना ये जन्म दिन!


परिंदों/परिंदे = birds. अंक = गोद।

लमहों/लमहे = moments.अमानत = धरोहर।

रब = ख़ुदा।इल्तिज़ा = दुआ।मानिंद = मुताबिक।


राधे रानी की कृपा बनी रहे तुम पर सदा 

पापा 

Sunday, March 22, 2026

वो 22 मार्च

मुश्किल है बहुत मुश्किल यादों को भुला देना 

आसान नहीं है जुदाई को दिल से बिदाई देना 

जन्मों की मुरव्वत से, मिल पाती है ऐसी निस्बत 

आसान नहीं है कुदरत की बेरुख़ी को भुला देना। 


घर तो वही है न, जहाँ कोई इंतिज़ार में बैठा हो 

तभी न पैर मुड़ते घरको, जब यादमें कोई बैठा हो 

पड़ते हैं क़दम मेरे अब जहाँ वो घर नहीं मकान है

कैसा लगेगा वो सूना मंज़र जहाँ सन्नाटा बैठा हो?


एक वो भी दिन था जब माँ इन्तिज़ार कर रही थीं 

और मैंने बाअदब, उनके हुक्म की तामील की थी 

एक घूँघट ने उनके आँगन का, सूनापन समेटा था 

और हवा की सरसराहट में स्वर लहरी तैर गई थी।


मुरव्वत = लगाव।निस्बत = relationship.मंज़र = दृश्य।

बाअदब = आदरपूर्वक।तामील = अनुपालन।


ये सूना मंज़र और मैं 

अजित सम्बोधि 

Tuesday, March 17, 2026

कितना कमाऊँ?

 एक ही सवाल है ज़ेहन में, पूछने के लिये 

कितना कमाऊँ, ख़ाली हाथ जाने के लिये?

…..

सिकन्दर को जाना था जीतने के लिये 

दुनियाँ, गया अरस्तू से मिलने के लिये।

अरस्तू ने दुआयें दीं उसके भले के लिये 

भेजा…डायोज़िनीज़ से मिलने के लिये।

….

डायोज़नीज़ ने पूछा कहाँ को चल दिये 

सिकन्दर ने कहा, दुनियाँ जीतने के लिये।

अच्छा दुनियाँ जीतोगे, मगर किसके लिये 

सोचा नहीं…शायद आराम करने के लिये।

अरे अरे इतनी मेहनत करोगे..इस के लिये 

आजा आजा मेरी झोंपड़ी है…इस के लिये!

….

दुनियाँ जीत ली, जा रहा हूँ, ख़ाली हाथ लिये 

डायोज़िनीज़ तुमने सही पूछा था, किसके लिये।

…..

जो सिकन्दर ने कहा उस दिन, सही है मेरे लिये 

मुझे जवाब मिल गया मन पसन्द आज मेरे लिये।


ओम शान्ति:

अजित सम्बोधि 

Saturday, March 7, 2026

जाऊँ कहाँ?

जाऊँ कहाँ, मिला न दर खुला
शाम हो चली, कोई ना मिला 
वक्त ने मुझे, क्यों दिया भुला 
कैसा सफ़र ,  कैसा ये सिला।

ख़्वाब थे कई, मिलने आ गये
भूली सी बातें, याद दिला गये
सोई थी आह , फ़िर जगा गये 
ख़ुश्क आँखें , मगर रुला गये।

सूरज ढल चला, पंछी उड़ चले
फूल थे कन्ज के , बन्द हो चले
रोशनी रुक गई, अँधेरे बढ़ चले 
रहगुज़र सभी , ओझल हो चले।

दिल को क्योंकर , समझाऊँ मैं 
मन को  क्योंकर , बतलाऊँ  मैं 
कितनी क़ीमत ,  चुकाई है मैंने 
हर बार ख़ुद से, मिला सिर्फ़ मैं।

सिला = इनाम।रहगुज़र = रास्ता/ रास्ते।

ओम् शिव
अजित सम्बोधि।

Wednesday, March 4, 2026

होली 2026

जब जब भी आता है ये बद्र ए कामिल 

बहुत ख़ुशी हो जाती है हमको हासिल   

कल ख़ुसूफ़ था कई जगहों पर , मगर 

हमको बद्र देखना हो गया था  हासिल।


आज तोहफ़े में मिली है खेलने की होली 

साल में एक बार मिलती है ये हमजोली 

चाह कर भी हम छुपा न पायेंगे  ख़ुद को 

ढूँढ ही लेगी हमको आज कोई तो टोली।


फ़िर होगा सिलसिला शुरू गले मिलने का 

साथ में रंगीन गुलाल चेहरों पर लपेटने का 

थोड़ी सी देर में नज़र आयेंगे हम नए रंग में 

जब चढ़ जाएगा हम पर ख़ुमार, अबीर का।


ये होली का त्योहार है दिलों को पास लाने को 

अरसे से रूँठे हुए दिलों को फ़िर से मिलाने को 

जो चेहरे बारूद बन कर  बरसने को तैयार  बैठे 

उन चेहरों पर फिर मुस्कुराहटें वापस लाने को।


सब को मुबारक हो आज की होली की ये रंगत 

आजा ओ मेरे मेहरबान बैठ जाओ बना के पंगत 

सुनाओ एक एक करके अपनी पसन्द  का गाना 

ताकि याद रहे कभी जुटी थी एक सुरीली संगत!


बद्र ए कामिल = पूर्णिमा का पूरा चाँद।

ख़ुसूफ़ = चंद्रग्रहण।बद्र = पूनम।

अबीर = ख़ुशबूदार रंग।


सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 

अजित सम्बोधि