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Monday, October 12, 2026

है न उसी में उतरता जानेमन?

अर्श से फ़र्श, देखे मस्कन 

पकड़ के देखे सभी दामन 

दिल की बढ़ती धड़कन से 

बढ़ती चली सिर्फ़ उलझन।


 अब न पूछता चाँद तारों से 

न पूछता  पीर ओ मुर्शिद से 

मुझे जो जाननी हक़ीक़त है 

पूछ लेता हूँ  सूनी आँखों से।


इनमें कोई  बेकसी नहीं है 

इनमें कोई  बेबसी  नहीं है 

सूनापन  पसरा  मिलता है 

ज़रा सी उजलत भी नहीं है।


ये आँखें ही  मेरा नशेमन हैं 

ये आँखें ही  मेरा  मस्कन हैं 

मुझे अज़ीज़ इनका सूनापन 

है न उसी में उतरता जानेमन?


देर हो गई मुझको मिलने में 

हाँ ख़ुद को ख़ुद से मिलने में 

क्या मुराद पूरी हो गई है मेरी?

किससे रूबरू होता मैं, सूने में?


अर्श = आसमान।फ़र्श = बिछौना।मस्कन = घर।

पीर ओ मुर्शिद = धार्मिक गुरु।बेकसी = परवशता।

उजलत = उतावलापन।नशेमन = घोंसला।

अज़ीज़ = प्यारा।जानेमन = जान जैसा प्यारा।

मुराद = आरज़ू।रूबरू = आमने सामने।आमीन = तथास्तु।


आमीन 

अजित सम्बोधि 


Sunday, October 11, 2026

क़िस्मत बदल गई

एक सुबह  आ गई, एक शाम  ढल गई 

रोशन हुआ हूँ जब से क़िस्मत बदल गई।

कुछ सब्ज़ मिल गई

कुछ सुर्ख़  मिल गई 

तन्हा  हुए  थे  लमहे 

कुछ  शाद  मिल गई 

ऐसा बनाया किरदार 

तेरी रहमत मिल गई 

अर्क  के  साथ  साथ 

कुछ   बर्क़ मिल  गई 

नाशाद  दिल को मेरे 

दिल-शाद  मिल  गई 

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


हर सिम्त गुलरंग हो गई 

महकन   से  है  भर  गई 

कोयल की कूक आ गई 

सब ओर फ़िर से छा गई 

दुआओं में बरकत आ गई 

शुआओं में रौनक भर गई 

मन से चकल्लस मिट गई 

गो कि पगधूल मिल गई 

राधे की रहमत मिल गई 

चातक को  बूँद मिल गई 

 रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


मुझे ख़बर नई मिल गई 

रहगुज़र आसान हो गई 

बचपन की याद आ गई 

फ़िक्र   छोड़  दिल   गई 

यादें यादों से  भर  गईं 

सिमट के गले लग गईं 

सपनों में समाअत आगई 

आबे चश्म ख़ुश्क हो गई

दास्तान  ख़त्म  नहीं  हुई 

दास्तान  आबाद  हो  गई

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


अब बस एक ही जुनून है 

कैसे  मिल जाये सुकून है 

ज़िन्दगी एक  दास्तान  है 

नज़रों के लिये आस्तान है 

हर सफ़र नियाज़ी सफ़र है 

चंद सवालात  का असर है 

एक दूजे के दिल में जाना है 

सोई क़िस्मत  को जगाना है 

हाँ  हाँ  मै  हूँ  पूरे  होश  में 

चले आओ मेरे  आग़ोश में 

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


सब्ज़ = हरी।सुर्ख़ = लाल।तन्हा = अकेले।

लमहे = क्षण।शाद = चैन।किरदार = role.

रहमत = कृपा।अर्क = पसीना।बर्क़ = दामिनी।

नाशाद = नाख़ुश।दिल शाद = दिल की ख़ुशी 

सिम्त = दिशा।गुल रंग = गुलाबी।बरकत = बढ़ोतरी।

शुआओं = किरणों।रहगुज़र = राह।समाअत= श्रवण शक्ति।

आबे चश्म = आँसू।दास्तान = क़िस्सा।जुनून = लगन।सुकून = चैन।

आस्तान = दहलीज़।नियाज़ी = निवेदित।आग़ोश = गले लगना।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

Friday, October 9, 2026

लहन ओ निदा ही मिलतीं

फ़िज़ायें घुमड़ के मिलतीं, दुआयें गूँज कर मिलतीं 

जहाँ जाता वहाँ मुझको, लहन ओ निदा ही मिलतीं।


बहुत हैं चाहने वाले 

वक़्त पर थामने वाले 

आईना साफ़ करते हैं 

नई  पहिचान  देते  हैं

आशियाना बनाने की 

हिकमत यहीं मिलती 

कूचा साफ़ करने की 

फ़ुरसत यहीं मिलती 

अगर है राह में मिलना 

तो राहें भी यहीं मिलतीं 

जहाँ जाता वहाँ मुझको लहन ओ निदा ही मिलतीं।


चमन गुलज़ार होते हैं 

बहुत दिलदार होते हैं 

कहीं हर रोज़ होते हैं 

कहीं इमरोज़ होते हैं 

कहीं उलझन में है माली 

उलझती  हर  नई  डाली 

किसी के ख़ार भी नायाब 

किसी के गुल बड़े बेआब 

किसी के अश्क़ पहिचान ले 

उसे  फ़रादीस  यहीं  मिलतीं 

जहाँ जाता वहाँ मुझको लहन ओ निदा ही मिलतीं।


दिलज़दा हो रहीं शामें 

फ़रसूदा बन चुकीं रातें 

बना दुश्वार मौसम ही 

करें क्या उंस की बातें 

मुक़द्दम हो न जो राज़ी 

समझो खो चुके बाज़ी 

करें फ़रियाद फ़िर किससे 

बने बुनियाद फ़िर जिससे 

धड़कनें दिल की पहचाने 

नबूवत तो उसे ही मिलतीं 

जहाँ जाता वहाँ मुझको लहन ओ निदा ही मिलतीं।


सर्द रातें, गरम आहें 

भरभरी हो रहीं आँखें 

खो गईं जो बेख़ुदी में 

हो गईं पुरनम हैं आँखें 

तपते हुए दिल में पड़े 

टूटे   हुये  नग़में   पड़े 

मायूस हैं नाशाद भी ये 

दिलशाद हैं ये दिलजले 

बात को जो सही समझे 

फ़िरासत है वहीं मिलती 

नग़मे भी वहीं हैं मिलते 

समाअत भी वहीं मिलती

जज़्बा ए जाँनिसारी और 

बोसी   भी  वहीं  मिलतीं 

जहाँ जाता वहाँ मुझको लहन ओ निदा ही मिलती।


लहन ओ निदा = मीठी आवाज़ में पुकार।आशियाना = घर।

हिकमत = होशियारी।इमरोज़ = वर्तमान दिन।फ़रादीस = heavenly 

abodes. दिलज़दा = टूटा दिल।फ़रसूदा = उदास।दुश्वार = कठिन।

उंस = प्यार।मुक़द्दम = मुख्य।नबूवत = पैग़म्बरी।फ़िरासत = अंतर्ज्ञान।

समाअत = सुनवाई।जज़्बा ए जाँनिसारी = जान निछावरी का हौसला।

बोसी = kissing. आमीन = so be it!


आमीन 

अजित सम्बोधि 

Monday, October 5, 2026

तुझे ढूँढना ही बस एक काम है

 तारीक मिटाता  हूँ, तस्वीर बनाता  हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ, तजवीज़ लगाता हूँ।


दिल एक समन्दर है 

नादाँ है, कलन्दर  है 

महबूब का दरपन है 

इंसाफ़ का मसकन है 

मन्सूर  का  मंज़र है 

सय्याद का खंजर है 

मैं उसका हक़ीक़ी हूँ 

अन्दर  से क़रीबी  हूँ 

ग़ैरों की बात  नहीं है 

अंदर की घात नहीं है 

तारीक मिटाता हूँ 

तस्वीर  बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ।


ज़रे सफ़ेद सी राहें हैं 

माहे नौ की निगाहें हैं 

गुदाख़्त  अलमास है 

अलसाया ऐहसास है 

पिघला हुआ नगीना है 

नौशा  का  सफ़ीना  है 

मत कहो याद नहीं 

ये गुज़री बात नहीं 

शैदाई अंदाज़ यही 

सावन में भादों यही 

तारीक मिटाता हूँ 

तस्वीर बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ 


रात भर सिकंदर की 

मानिंद घूमा किया 

दिन भर पिसंदर की 

तरह फ़ाक़ा किया 

तू चाहे फ़लक से पूँछ ले 

तू चाहे गुलदुम से पूँछ ले 

मुझे तेरा एतिबार है 

मुझे तेरा इंतिज़ार है 

तेरा कूँचा बड़ा  दरबार है 

तेरे ख़ुलूस से मुझे प्यार है 

तारीक़ मिटाता हूँ 

तस्वीर बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ।


तुझसे सीखा प्यार मैंने 

सबको लगाया गले मैंने 

तूने किया बड़ा एहसान 

वरना रहता मैं पशेमान 

लमहात को बनाया लतीफ़ 

अलीफ़ को बनाया आलिफ़ 

मैंने क़सम खाई है 

तन्हाई की दुहाई है 

तेरा दामन पकड़े रखूँगा 

तुझसे  न  जुदा  होऊँगा 

तारीक़ मिटाता हूँ 

तस्वीर बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ।


पर मुझे ये तो बता दे 

हाँ सिर पे हाथ रख दे 

मुझे  तूने  ख़ूब  भरमाया 

अब तक कुछ नहीं बताया 

लाख  मिन्नतें  कीं 

किल्लतें भी ख़ूब थीं 

ये तो बता देता तू है कौन 

क्यों बना रहता है तू मौन 

क्या ज़िन्दगी  तुझे ढूँढने का नाम है 

क्या तुझे ढूँढना ही बस एक काम है 

तारीक़ मिटाता हूँ 

तस्वीर बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ।


देख मुझको और न सता 

जब तक न लगेगा ये पता 

कि आख़िर तू है कौन 

कैसे जानूँगा मैं हूँ कौन 

ख़ुद  को  जानने  के  लिये ही 

ख़ुद को पहिचानने के लिये ही 

ख़ाक  छानता  आ  रहा हूँ 

ख़ुदी को मिटाता आ रहा हूँ 

तुझको ढूँढता फिर रहा हूँ 

नाकारा बना  फिर रहा हूँ 

तारीक़ मिटाता हूँ 

तस्वीर बनाता हूँ 

तस्दीक़ कराता हूँ 

तजवीज़ लगाता हूँ।


तारीक = अँधेरा।तस्दीक़ = प्रमाण।तजवीज़ = तरीक़ा।

कलंदर = मस्ताना।महबूब = प्रिय।मसकन = घर।

मन्सूर = एक सूफ़ी संत।मंज़र = दृश्य।सय्याद = शिकारी।

खंजर = छुरा।हक़ीक़ी = सगा।ज़रे सफ़ेद = चाँदी सा सफ़ेद।

माहे नौ = नया चाँद।गुदाख़्त = पिघला हुआ।अलमास = हीरा।

नौशा = दूल्हा।सफ़ीना = कश्ती।शैदाई = प्रेम दिवाना।

पिसंदर = सौतेला बेटा।फ़ाका = भूख।फ़लक = आसमान।

गुलदुम = बुलबुल।एतवार = भरोसा।ख़ुलूस = सच्चाई।

पशेमान = शर्मिंदा।लमहात = moments.लतीफ़ = निर्दोष।

अलीफ़ = मित्र।आलिफ़ = स्नेहिल।तन्हाई = अकेलापन।

दामन = पल्लू।आमीन = एवमस्तु।


आमीन 

अजित सम्बोधि 

Monday, September 28, 2026

बिटियाओं का दिन

मालिक ने बिटिया बनाई, आँखों का तारा बनाई
करके करम उसने हम पर, सबका सहारा बनाई।

जिस दिन हुई थी बिदाई
जिस दिन हुईं तुम पराई
वो  दिन  नहीं  भूला हूँ मैं 
जिस दिन हुई थी जुदाई 
क्यों दुनिया ने ऐसी बनाई, ये रीत क्योंकर बनाई
लाड़ों से पाला था जिसको, क्योंकर वो ही गँवाई।

क्या ग़ज़ब तूने लाड़ली बनाई
जहाँ रहती , ख़ुशियाँ ही  लाई
पहिले   गोदी   हमारी  सजाई
अब रौनक  उनके यहाँ  है लाई
दुनिया ने रीत बनाई, पर लाड़ो से न जीत पाई
अनजान वादियों में जाके, बगिया उसने सजाई ।

जब मालिक ने बिटिया बनाई
सारी  चतुराई   उसमें   लगाई
ख़ुद को रखती है पीछे हरदम
आगे बढ़  कर  करती  भलाई
वाह मालिक तेरी करिश्माई, क्या ख़ूब तूने दिखाई 
ज़िन्दा हैं  सब  इसी  से,  तूने  जो  रहमत  दिखाई।

करम = रहमत = ईश्वरीय कृपा।

सब बिटियाओं को प्यार 
पापा

नाम ए लख़्त ए जिगर

गुले सुर्ख़ हो तुम, गुले जाफ़री 

मेरी गुंचा हो तुम, मेरी शायरी 

लख़्त ए जिगर हो मेरी लाड़ली 

तुम्हीं से सजी है मेरी फुलवारी 

अगर कोई तुमको हटाये डगर से 

अगर कोई तुमको गिराये नज़र से 

न आँसू बहाना न दिल को दुखाना 

चमनआरा  तेरा, मुझे याद  करना।


गुलूसोज़ हो, मेरी गुलरोज़ हो 

गुल्फ़िशाँ हो, सरफ़राज़ हो 

सहरा में सहारा, हमराज़ हो 

तुम ही तो मेरी इम्तियाज़ हो 

अगर कोई तुमसे हटा ले सिपर 

अपना कोई तुमसे जुदा हो जिगर 

न आँसू बहाना, न दिल को दुखाना 

नख़्लबंद हूँ तिरा, मुझे याद करना।


मेरी जुस्तजू हो, मेरी रग ए गुलू हो 

मेरी आरज़ू हो, मेरी ख़ुशगुलू हो 

तिशनगी बुझाने तिशनागुलू की 

गुलशन में बहती एक गुलूल हो

अगर कोई वादे से जाये मुकर 

अगर कोई अपने से छोड़े सफ़र 

न आँसू बहाना, न दिल को दुखाना 

गुलचीं हूँ तेरा, मुझे याद करना।


गोदी में तुमको खिलाया है मैंने 

कंधे से तुमको लगाया है मैंने 

लोरी सुनाके सुलाया है मैंने 

अश्कों को तेरे पोंछा है मैंने 

अगर कोई कभी भी तुमको रुलाये 

ज़रे जाफ़री की जमैयत मिटाये 

न अश्कों को पीना, न जी को दुखाना 

अब्बू हूँ तेरा, तू मुझको बताना।


गुले सुर्ख़ = गुलाब का फूल। गुले जाफ़री = केसर का फूल।

गुंचा = कलिका। लख़्त ए जिगर = जिगर का टुकड़ा।

चमनआरा = बाग़वान।गुलूसोज़ = गुलरोज़ = फुलझड़ी।

गुल्फ़िशाँ = रोशन झड़ी। सरफ़राज़ = ऊँचे सर वाली।

सहरा = desert devoid of oases. हमराज़ = राज़दार।

इम्तियाज़ = पहचान। सिपर = सुरक्षा।नख़्लबंद = बाग़वान।

जुस्तजू = तलाश।रग ए गुलू = सबसे मुख्य नाड़ी।

आरज़ू = मिन्नत। ख़ुशगुलू = dulcet throated.

तिशनगी = प्यास।तिशनागुलू = प्यासा।गुलशन = बाग़।

गुलूल = streamlet meandering through trees.

ग़ुलचीं = nursery man.अश्कों = आँसुओं।

ज़रे जाफ़री = खरा सोना।जमैयत = status.अब्बू = पिता।

आमीन = so be it! a prayer to the almighty!


आमीन

अजित सम्बोधि 

Saturday, September 26, 2026

प्रज्ञा का जन्म दिन

जनम दिन मुबारक हो तुमको प्रज्ञा 

एक बात  बता दूँ  मैं  तुमको  प्रज्ञा 

प्रज्ञा की कभी नहीं होती  है  अवज्ञा 

सबको प्रज्ञा से लेनी होती है अनुज्ञा।


बधाई  हो तुमको  तुम्हारे  नाम पर 

तुम्हें नहीं करना कोई काम डर कर 

तुम्हारा जो है वो सुन्दर आशियाना 

वही रहेगा तुम्हारा दिलकुशा उम्र भर।


नहीं भूल सकता वक़्त जो गुज़रा वहाँ 

मेरी खिड़की से चाँद दिखता था वहाँ 

कई घंटे का साथ देता था मुझको वो 

सटोरी होती थी उसकी चाँदनी में वहाँ।


मैपल का पेड़ भी था मेरा एक साथी वहाँ 

मैं उसकी छाँव में अक्सर बैठता था वहाँ 

रोबिन, रैन, फ़िंच, चिकेडी आती थीं वहाँ 

मैं उनको दाना पानी दिया करता था वहाँ।


प्रज्ञा = अंतर्दृष्टि।अवज्ञा = अवहेलना।

अनुज्ञा = अनुमति।आशियाना = घर।

दिलकुशा = दिल को ख़ुशी देने वाला।

सटोरी = समाधि की एक अवस्था।


जय राधे राधे 

पापा 

Monday, September 14, 2026

एक वो ज़माना था

एक वो ज़माना था हाँ एक वो ज़माना था 

जो कभी  मेरी आँखों  में बसा परवाना था 

जिधर नज़र घुमाता उधर ही अफ़साना था 

आँखे बन्द कर लेता तो वो भी नज़राना था।


छोटी सी आँख में  समाया  सारा ज़माना था 

कभी तितलियाँ  पकड़ने  में  टकटकाना  था 

कभी खिसिया के आँख का मिचमिचाना था 

कभी दौड़ लगाते इंजिन का छुकछुकाना था।


कभी तमन्ना होती कि चाँद को पकड़ लूँ मैं

फ़िर उसको बाहों में भर के उससे ये पूछूँ मैं 

तुम इतने जमील हो मगर इतने दूर क्यों हो 

क्या ये मुमकिन नहीं तुम्हारे पास रह सकूँ मैं?


मैं उसे अपनी आँखों में भर लिया करता था 

आँखें बन्द करने पे वो मुझे दिखा करता था 

वो मुझको पसन्द था और मैं उसे पसन्द था 

वो मुझसे मेरी नींद में बातें किया करता था।


कभी बारिश बरसती तो मैं थिरकने लगता था 

काग़ज़ की कश्ती बरसते पानी में चलाता था 

क्या दिन थे ये खेल मेरी जागीर हुआ करते थे 

 यही वक़्त था जो मेरा बचपन हुआ करता था!


वो बचपन का ज़माना भी कैसा सुहाना होता था 

किसी फ़िक्र से कभी कहीं मिलना नहीं होता था 

परियों की किताबों में परियों से मिलना होता था 

फ़िर माँ की गोदी में आख़िरी  ठिकाना  होता था।


अफ़साना = क़िस्सा।नज़राना = gift.

तमन्ना = इच्छा।जमील = अति सुंदर।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि 

जिस दिन

 जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा 

वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।


यूँ ही नहीं मैंने अब तक गुज़ारे हैं दिन 

नहीं लेता हूँ साँस तुझे याद किये बिन 

मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा

मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा 

                    जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा 

                    वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।


रात भर दिया जला करता है तेरे लिए  

ओस बनके टपकती हैं आँखें तेरे लिए 

याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?

याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?

                     जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा 

                     वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।


ये मेरी कश्ती है और ये जल की धारा 

नज़र आता नहीं है दूर तलक  किनारा 

पता नहीं कितनी बार लगाना है  फेरा?

पता नहीं कितनी बार लगाना है  फेरा ?             

                      जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा 

                       वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।


देखो आसमान को छूती हुई पहाड़ियाँ 

और धीरे धीरे रेंगती हुई ये पगडण्डियाँ 

चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा

चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा 

                          जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा 

                          वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।


उज़्र = एतिराज़। ग़र = यदि। दीदार = मुलाकात।

क़दमबोस = आदर पूर्वक चरण स्पर्श करने वाला।


क़दमबोस 

अजित सम्बोधि