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Tuesday, March 17, 2026

कितना कमाऊँ?

 एक ही सवाल है ज़ेहन में, पूछने के लिये 

कितना कमाऊँ, ख़ाली हाथ जाने के लिये?

…..

सिकन्दर को जाना था जीतने के लिये 

दुनियाँ, गया अरस्तू से मिलने के लिये।

अरस्तू ने दुआयें दीं उसके भले के लिये 

भेजा…डायोज़िनीज़ से मिलने के लिये।

….

डायोज़नीज़ ने पूछा कहाँ को चल दिये 

सिकन्दर ने कहा, दुनियाँ जीतने के लिये।

अच्छा दुनियाँ जीतोगे, मगर किसके लिये 

सोचा नहीं…शायद आराम करने के लिये।

अरे अरे इतनी मेहनत करोगे..इस के लिये 

आजा आजा मेरी झोंपड़ी है…इस के लिये!

….

दुनियाँ जीत ली, जा रहा हूँ, ख़ाली हाथ लिये 

डायोज़िनीज़ तुमने सही पूछा था, किसके लिये।

…..

जो सिकन्दर ने कहा उस दिन, सही है मेरे लिये 

मुझे जवाब मिल गया मन पसन्द आज मेरे लिये।


ओम शान्ति:

अजित सम्बोधि 

Saturday, March 7, 2026

जाऊँ कहाँ?

जाऊँ कहाँ, मिला न दर खुला
शाम हो चली, कोई ना मिला 
वक्त ने मुझे, क्यों दिया भुला 
कैसा सफ़र ,  कैसा ये सिला।

ख़्वाब थे कई, मिलने आ गये
भूली सी बातें, याद दिला गये
सोई थी आह , फ़िर जगा गये 
ख़ुश्क आँखें , मगर रुला गये।

सूरज ढल चला, पंछी उड़ चले
फूल थे कन्ज के , बन्द हो चले
रोशनी रुक गई, अँधेरे बढ़ चले 
रहगुज़र सभी , ओझल हो चले।

दिल को क्योंकर , समझाऊँ मैं 
मन को  क्योंकर , बतलाऊँ  मैं 
कितनी क़ीमत ,  चुकाई है मैंने 
हर बार ख़ुद से, मिला सिर्फ़ मैं।

सिला = इनाम।रहगुज़र = रास्ता/ रास्ते।

ओम् शिव
अजित सम्बोधि।

Wednesday, March 4, 2026

होली 2026

जब जब भी आता है ये बद्र ए कामिल 

बहुत ख़ुशी हो जाती है हमको हासिल   

कल ख़ुसूफ़ था कई जगहों पर , मगर 

हमको बद्र देखना हो गया था  हासिल।


आज तोहफ़े में मिली है खेलने की होली 

साल में एक बार मिलती है ये हमजोली 

चाह कर भी हम छुपा न पायेंगे  ख़ुद को 

ढूँढ ही लेगी हमको आज कोई तो टोली।


फ़िर होगा सिलसिला शुरू गले मिलने का 

साथ में रंगीन गुलाल चेहरों पर लपेटने का 

थोड़ी सी देर में नज़र आयेंगे हम नए रंग में 

जब चढ़ जाएगा हम पर ख़ुमार, अबीर का।


ये होली का त्योहार है दिलों को पास लाने को 

अरसे से रूँठे हुए दिलों को फ़िर से मिलाने को 

जो चेहरे बारूद बन कर  बरसने को तैयार  बैठे 

उन चेहरों पर फिर मुस्कुराहटें वापस लाने को।


सब को मुबारक हो आज की होली की ये रंगत 

आजा ओ मेरे मेहरबान बैठ जाओ बना के पंगत 

सुनाओ एक एक करके अपनी पसन्द  का गाना 

ताकि याद रहे कभी जुटी थी एक सुरीली संगत!


बद्र ए कामिल = पूर्णिमा का पूरा चाँद।

ख़ुसूफ़ = चंद्रग्रहण।बद्र = पूनम।

अबीर = ख़ुशबूदार रंग।


सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 

अजित सम्बोधि 

Tuesday, March 3, 2026

Holi 2026

 It’s all about how to celebrate Holi

Legend has it,  it’s about being holy

Holi is a markedly  popular festival 

It’s a playful way of becoming jolly.


People use colours and paints deftly 

So as to carve out designs  amicably 

But in Holi, our aim is to get giggles 

Holi festival harnesses joy intensely!


We apply colour to each other’s face

Then nobody can recognise any face

Becoming nobodies we merge in One

Skylarking works as promise of grace!


So let’s play Holi, it’s tremendous fun

Invite everyone to join, it harms  none

In this era of bombs, shrieks and death

Let it be a catalyst of joy for everyone!


Wishing Everyone A Happy Holi

Ajit Sambodhi

Tuesday, February 24, 2026

कभी ऐसे चल पड़ा था मैं

 ज़िन्दगी निकल गई चैन भी  मिला  नहीं 

सोचा:क्या है ज़िन्दगी, जान पाया मैं नहीं।


कभी इस राह पर 

चल पड़ा था सब्र कर 

दिल में कान्हा को लिया 

बंद दरवाज़ा किया 

आँख की किनार से 

टपका था कुछ प्यार से 

वक्त ने पुकार दी रुक न पाया मैं मगर 

सूनी सूनी थी डगर नई नई थी डगर।


जिस सिम्त मैं था जा रहा 

नज़र को था घुमा रहा 

हमराज़ कोई बना नहीं 

हमराह कोई दिखा नहीं 

मुझको थी न कोई ख़बर 

पहुँचूँगा मैं कब किधर

लो आँख बंद  हो गईं

लो साँस बंद  हो गई।


मैं सम्हल गया गिरता हुआ 

मैं बैठ गया लुढ़का हुआ 

आँख ऊपर चढ़ गईं 

 कमर सीधी हो गई 

अँधेरा घुलने लग गया 

रौशनी में धुल गया 

मैं बैठा बैठा जम गया 

और सबेरा हो गया!


फ़िर न कह पाया कभी चैन तो मिला नहीं 

या कि ज़िन्दगी को पहिचान पाया मैं नहीं।


वाह कान्हा वाह 

अजित सम्बोधि 

Friday, February 20, 2026

कैसे भुला दूँ तुझे मैं भला

 मैं  सोता  रहा , तू  जगता  रहा

तू हर दम  मुझे  लाड़ करता  रहा 

अब कैसे  भुला दूँ, तुझे  मैं  भला

साँस बनकर  मेरी,  तू बहता  रहा।l


मैं लड़ता  रहा और झगड़ता  रहा 

ख़िलक़त की दौड़ में दौड़ता  रहा 

तू हर वक़्त ख़ैरख़्वाह बन कर  रहा   

दिल की धड़कन बन धड़कता रहा।


क्या कुछ नहीं दे दिया तूने मुझे

सूरज आता रोज़ जगाने को मुझे 

यामिनी आती है सुलाने  को मुझे 

मुफ़्त में मिलतीं ये ख़िदमात मुझे।


पेड़ों को देखो खड़े रहते उम्र भर 

धूप हो सर्दी हो बरखा हो जी भर 

देते छाया, फूल, फल  झोली भर 

और रूह ए रवाँ संजीवनी उम्र भर।


तू हयात बख़्श, सब बख़्शा  रहा है 

बिना माँगे ख़ुद ही अता कर रहा है 

कैसे कोई भुला सकता  है  तुझको 

नक़द दम उदर, परवरिश कर रहा है।


ख़िलक़त = दुनियाँ।ख़ैरख़्वाह = भला चाहने वाला।

यामिनी = रात।ख़िदमात = सेवायें।रूह ए रवाँ = प्राणवायु, O2. 

संजीवनी = जीवन देने वाली। हयात बख़्श = जीवनदाता।

अता = देना।नक़द दम = अकेला।उदर = पेट।परवरिश = nourish.

मुरीद ए ताउम्र = सारी उम्र का follower.


मुरीद ए ताउम्र 

अजित सम्बोधि 

Monday, February 16, 2026

मेरा दोस्त घनश्याम!

चेहरे से चुस्त हो ,  सफ़ा-परस्त   हो
नेक दिल हो, ख़ुश दिल हो, मस्त हो
इतनी ख़ूबियाँ  लिए  फिरते हो  यार 
क्यों न हर दिल  घनश्याम-परस्त हो?

हाँ, सुना करता हूँ तुमको  मैं अक्सर 
तुम्हारी बातें होती हैं  बड़ी पुर-असर
क्या ख़ूब ज़ेहानत पाई है  बरख़ुरदार
मुख़्तसर भी  नहीं  होता है  बे-असर!

रबने बख़्शी है बड़ी इनायत तुम  पर 
झोली भरके  कर  दी कृपा  मयस्सर
प्यार को उड़ेला है मालिक ने तुम  पे
दिल होता बाग़ बाग़ तुम को देखकर।

दिल से दुआऐं भेज रहा हूँ मैं  तुमको 
रब  की रहमत  मिले  दायम  तुमको 
उम्र के आख़िरी पड़ाव  पर बैठा  हूँ मैं 
देख ली  इंसानियत, देख कर  तुमको।

सफ़ा-परस्त = स्पष्ट वादी।पुर-असर = असरदार।
ज़ेहानत = प्रतिभा।मुख़्तसर = रत्ती मात्र।
दायम = हमेशा।दिलनशीं ए ताउम्र = उम्रभर का मित्र।

दिलनशीं ए ताउम्र 
अजित सम्बोधि