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Thursday, April 30, 2026

बैसाख पूर्णिमा

 आज बैसाख पूर्णिमा है , बुद्ध पूर्णिमा है 

याद रहे, बुद्ध जयंती नहीं, बुद्ध पूर्णिमा है 

जयंती दर्शाती है जन्म मरण, मरण जन्म 

जब कि पूर्ण से पूर्णतम दर्शाती पूर्णिमा है!


बुद्ध अवतरित हुए, एकान्त में, लुम्बिनी में 

महामाया द्वारा, एक अति मनोरम उपवन में 

साल वन के वृक्षों की  सुगन्ध पूरित गोद में 

बैसाख की पूर्णिमा के  चन्द्रमा की आभा में!


३५ वर्ष की आयु में वे पूर्ण से पूर्णतर हो गए 

निरंजना यानी निर्मल नदी के तट पर हो गए 

सुजाता के लिए बोधिवृक्ष के देवता हो गए 

बैसाख पूर्णिमा को खीर खाके बुद्ध हो गए।


जब कुशीनगर में थे, वे अस्सी वर्ष के हो गए 

लगने लगा था ,  वापस जाने के दिन आ गए 

बैसाख का चिरपरिचत पूर्ण चंद्र चमकता था 

और तब वे अपने पूर्णतम परिवेश में समा गए!


बुद्ध से लोग पूँछते आप कौन? वे कहते तथागत 

जब कुछ बनना नहीं होता तभी तो हौंगे तथागत 

नदी समन्दर में समाती, खोती नहीं, होती पूर्णतम 

जब पूर्ण पूर्णतम में समाया बस तभी से तथागत!


बुद्धम् शरणम् गच्छामि 

अजित सम्बोधि 

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