हम जंगबाज़, जंगबाज़ी हमारा इक़राम है
जंगआज़माई से ही तो मिलता एहतराम है
जब तक न जंग हो, हमें मिलता नहीं चैन है
धरती सुधार दी अब चाँद अगला मुक़ाम है।
देखिए कोई जंगबाज़ हो या कि कबूतरबाज़
चाहे वो तीरंदाज़ हो या फिर बड़ा तीतरबाज़
ये बाज़ियाँ जानलेवा हैं कैसे करें नज़रअंदाज़?
कोई समझाये कि क्यों नहीं बनते पतंगबाज़?
बाज़ी पसंदगी है तो बन जाइये दिल्लग़ीबाज़
या तमाशेबाज़ , या जल्दबाज़ी का कलाबाज़
हेकड़ीबाज़ मत बनिये, बड़ी नुकसानदायक है
नाम कमाना चाहते हैं तो बन जाइये बल्लेबाज़!
जंगबाज़ = लड़ाका।इकराम = इनाम।
एहतराम = आदर।मुक़ाम = पड़ाव।
नज़रअंदाज़ = जिस पर ध्यान न दिया गया।
ओम शान्ति:
अजित सम्बोधि

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