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Thursday, April 9, 2026

नाचना

ये धरती नाचती, माहताब नाचता है 
सितारे नाचते और फ़लक नाचता है 
ये कौन है जो मेरे, दिल में आगया है 
बना के जोड़ी वो, मेरे  संग नाचता है।

ये ना समझना ये कोई और नाचता है 
भोला सा बनके जो  हरदम नाचता है 
ये तो वही  है जो  सबको नचा रहा है 
ये ही  तो  है जो  मेरे  संग  नाचता  है।

सुनो नाचना ख़ुद ब ख़ुद होता रहता है 
जब भी दिल चाहता, ये होने लगता है 
मैं दिल से कहता हूँ फ़ुर्सत में नाचा कर 
वो बोला फुर्सत का किसे ध्यान रहता है!

अब कैसे बताऊँ मैं कि वो कैसे नाचता है 
सच कहूँ, वो अब्र ए नूर हो हो नाचता है 
जब भी आप नाचें , ज़रा ग़ौर कर लेना
येकि आप नाचते हैं याकि वो नचाता है।

माहताब = चाँद। फ़लक = आसमान।
अब्र ए नूर = प्रकाश का बादल।

ओम् शान्ति: 
अजित सम्बोधि।

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