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Thursday, May 7, 2026

बुद्ध का मार्ग

 जिस मार्ग पर चलते रहे थे बुद्ध 

वही मार्ग जाना जाता है  विशुद्ध 

मन को मिलती है शान्ति वहाँ पे 

भटकने पर मिलते हैं  सिर्फ़  युद्ध।


दुख अनिवार्य है, बुद्ध ने  कहा है 

निवारण सम्भव है, ये भी कहा है 

दुख जन्म लेता लालसा रखने से 

लालसा का गर्भ भूत भविष्य में है।


जब हम भूत या भविष्य में रहते हैं 

लालसा का निर्माण करते रहते हैं 

वर्तमान में  करिश्मा  हो  जाता  है 

लालसा के  पद चाप  रुके रहते हैं।


जब भी हम साँस उथली कर लेते हैं 

भय, लालसा, क्रोध को जन्म देते हैं 

साँस के गहरी होते ही, आप पायेंगे 

प्रेम व करुणा उत्पन्न होने लगते हैं!


इसे ही बुद्ध का मध्यम मार्ग कहते हैं 

क्रोध की जगह प्रेम करुणा ले लेते हैं 

लालसा मौन में परिवर्तित हो जाती है 

भंते एक निरापद जीवन जीने लगते हैं।


बुद्धम् शरणम् गच्छामि!

अजित सम्बोधि 

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