मैं सोता रहा , तू जगता रहा
तू हर दम मुझे लाड़ करता रहा
अब कैसे भुला दूँ, तुझे मैं भला
साँस बनकर मेरी, तू बहता रहा।l
मैं लड़ता रहा और झगड़ता रहा
ख़िलक़त की दौड़ में दौड़ता रहा
तू हर वक़्त ख़ैरख़्वाह बन कर रहा
दिल की धड़कन बन धड़कता रहा।
क्या कुछ नहीं दे दिया तूने मुझे
सूरज आता रोज़ जगाने को मुझे
यामिनी आती है सुलाने को मुझे
मुफ़्त में मिलतीं ये ख़िदमात मुझे।
पेड़ों को देखो खड़े रहते उम्र भर
धूप हो सर्दी हो बरखा हो जी भर
देते छाया, फूल, फल झोली भर
और रूह ए रवाँ संजीवनी उम्र भर।
तू हयात बख़्श, सब बख़्शा रहा है
बिना माँगे ख़ुद ही अता कर रहा है
कैसे कोई भुला सकता है तुझको
नक़द दम उदर, परवरिश कर रहा है।
ख़िलक़त = दुनियाँ।ख़ैरख़्वाह = भला चाहने वाला।
यामिनी = रात।ख़िदमात = सेवायें।रूह ए रवाँ = प्राणवायु, O2.
संजीवनी = जीवन देने वाली। हयात बख़्श = जीवनदाता।
अता = देना।नक़द दम = अकेला।उदर = पेट।परवरिश = nourish.
मुरीद ए ताउम्र = सारी उम्र का follower.
मुरीद ए ताउम्र
अजित सम्बोधि

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