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Friday, January 23, 2026

आगया बसन्त

आगया बसन्त छाई मौसमे बहार है 

बुलबुल ने फ़िर से लगा दी गुहार है 

सर्द हवाओं से  मिल गई  निजात है 

रवि बरसा रहा किरणों की फुहार है।


कलियाँ मुस्कुराने लगीं रौनक़े बहार है 

देखो बसंत आ गया हर तरफ़ पुकार है 

हर चेहरा खिल उठा  नज़रों में सिंगार है 

ये है ऐसी ताज़गी जो सबको दरकार है।


खेतों में पीली सरसों का लग रहा अंबार है 

लगता है जैसे हो रही हो सौने की बौछार है 

मन सभी के पुलकित हैं पाके नया संसार है 

सर्दी की बिदाई पे हर ओर जय जय कार है।


सबको बसंत पंचमी की बधाई 

अजित सम्बोधि 

Wednesday, January 21, 2026

जनम दिन मुबारक हो

 जन्म दिन  मुबारक  हो दिव्या तुमको 

ख़ुशियों का अम्बार मिल जाये तुमको 

वक़्त की मेहरबानियाँ ऐसी हों तुम पर 

बख़्शिश ए रब सब मिल जाँय तुमको!


 ये जो ज़िन्दगी मिली है, है बड़ी सौगात 

हर रोज़ सूरज की किरणें लातीं हैं प्रभात 

हर रोज़ एक नई ज़िन्दगी मिलती है हमको 

ये प्रभात है याकि तवील ए उम्र की बारात?


ख़ुशियाँ तुम्हारी होती हैं ख़ुशियाँ हमारी भी 

टकराके तुमसे, वो आतीं जानिब हमारी भी 

ये प्रभात की खुशियाँ तुमको सजाया करें 

ताकि चेहरा तुम्हारा मुस्कुराना न भूले कभी!


बख्शिश ए रब = god’s gift. सौगात = gift.

तवील ए उम्र = उम्र की लम्बाई।जानिब = दिशा में।


सदा मुस्कुराती रहो बिटिया 

पापा 

Thursday, January 1, 2026

नये साल का गीत

 नया साल आ रहा हैं नए सपने ला रहा है 

नई उड़ानें भरने को, नया जज़्बा ला रहा है।


मालिक ने है बख्शा हमको, इतना बड़ा जहाँ 

ज़मीं से लेके फ़लक तक क्या कुछ नहीं यहाँ 

सुबह कली मुस्कुराती, शाम में तारे जगमगाते 

क्यों ना कर लें हम इबादत, मेरा मन कह रहा है।


कभी चाँद झुरमुट की ओट से, कैसा झाँकता है 

कभी सूरज बादलों में से, अकस्मात  झाँकता है 

सब कुछ जो हो रहा है, कितना सुहाना लगता है 

हम पर रब कितनी रहनुमाई, हरदम  कर  रहा है।


जो कुछ बाहर हम देखते वो अंदर का अक्स है 

कभी अंदर में तो झाँकना, कैसा हो रहा रक़्स है 

 अब के नये दिन पर पलकों को गिरा के रखना 

फ़िर देखना पर्दे के पीछे कैसा कमाल हो रहा है।


फलक = आसमान।जज़्बा = कुछ कर गुज़रने का जोश।

रब = ईश्वर। अक्स = reflection. रक़्स = dance.


सब को नये साल की शुभ कामनायें 

अजित सम्बोधि