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Thursday, January 1, 2026

नये साल का गीत

 नया साल आ रहा हैं नए सपने ला रहा है 

नई उड़ानें भरने को, नया जज़्बा ला रहा है।


मालिक ने है बख्शा हमको, इतना बड़ा जहाँ 

ज़मीं से लेके फ़लक तक क्या कुछ नहीं यहाँ 

सुबह कली मुस्कुराती, शाम में तारे जगमगाते 

क्यों ना कर लें हम इबादत, मेरा मन कह रहा है।


कभी चाँद झुरमुट की ओट से, कैसा झाँकता है 

कभी सूरज बादलों में से, अकस्मात  झाँकता है 

सब कुछ जो हो रहा है, कितना सुहाना लगता है 

हम पर रब कितनी रहनुमाई, हरदम  कर  रहा है।


जो कुछ बाहर हम देखते वो अंदर का अक्स है 

कभी अंदर में तो झाँकना, कैसा हो रहा रक़्स है 

 अब के नये दिन पर पलकों को गिरा के रखना 

फ़िर देखना पर्दे के पीछे कैसा कमाल हो रहा है।


फलक = आसमान।जज़्बा = कुछ कर गुज़रने का जोश।

रब = ईश्वर। अक्स = reflection. रक़्स = dance.


सब को नये साल की शुभ कामनायें 

अजित सम्बोधि