आगया बसन्त छाई मौसमे बहार है
बुलबुल ने फ़िर से लगा दी गुहार है
सर्द हवाओं से मिल गई निजात है
रवि बरसा रहा किरणों की फुहार है।
कलियाँ मुस्कुराने लगीं रौनक़े बहार है
देखो बसंत आ गया हर तरफ़ पुकार है
हर चेहरा खिल उठा नज़रों में सिंगार है
ये है ऐसी ताज़गी जो सबको दरकार है।
खेतों में पीली सरसों का लग रहा अंबार है
लगता है जैसे हो रही हो सौने की बौछार है
मन सभी के पुलकित हैं पाके नया संसार है
सर्दी की बिदाई पे हर ओर जय जय कार है।
सबको बसंत पंचमी की बधाई
अजित सम्बोधि

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