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Friday, January 23, 2026

आगया बसन्त

आगया बसन्त छाई मौसमे बहार है 

बुलबुल ने फ़िर से लगा दी गुहार है 

सर्द हवाओं से  मिल गई  निजात है 

रवि बरसा रहा किरणों की फुहार है।


कलियाँ मुस्कुराने लगीं रौनक़े बहार है 

देखो बसंत आ गया हर तरफ़ पुकार है 

हर चेहरा खिल उठा  नज़रों में सिंगार है 

ये है ऐसी ताज़गी जो सबको दरकार है।


खेतों में पीली सरसों का लग रहा अंबार है 

लगता है जैसे हो रही हो सौने की बौछार है 

मन सभी के पुलकित हैं पाके नया संसार है 

सर्दी की बिदाई पे हर ओर जय जय कार है।


सबको बसंत पंचमी की बधाई 

अजित सम्बोधि 

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