बच्चे परिंदों की तरह उड़ जाते हैं बड़े होने पर
कुछ यादें छोड़ जाते हैं, याद करने को उम्र भर
जया, मुझे याद है पचपन वर्ष पूर्व का वो दिन
जब तुम्हें देखा था पहली बार अपने अंक में भर।
सूरज की पहली पहली किरण तुम्हें छू रही थी
चाँदनी उचक उचक के तुमको पुचकार रही थी
तुम अपनी माँ की गोदी में दुबक के सो रही थीं
कभी मुस्कुरा देती थीं मानो सपना देख रही थीं।
मैं बीते हुए लमहों को याद कर कर रोता नहीं हूँ
मैं उनको याद कर के ज़ोरों से हँसता भी नहीं हूँ
ये यादें तो ज़िंदगी भर की अमानत हुआ करती हैं
इसलिए मैं इन्हें याद कर कर के जिया करता हूँ।
तुम्हें बिटिया आज मुबारक हो तुम्हारा ये जन्म दिन
मैं ख़ुशनसीब हूँ देख पा रहा हूँ तुम्हारा ये जन्म दिन
रब से इल्तिज़ा है बख़्शा करे इसी मानिंद जन्म दिन
ताकि तुम मनाती रहो ख़ुश ख़ुश अपना ये जन्म दिन!
परिंदों/परिंदे = birds. अंक = गोद।
लमहों/लमहे = moments.अमानत = धरोहर।
रब = ख़ुदा।इल्तिज़ा = दुआ।मानिंद = मुताबिक।
राधे रानी की कृपा बनी रहे तुम पर सदा
पापा

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