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Friday, June 12, 2026

बादल से बरसते हें आँसू।

बादल  से बरसते  हें  आँसू

गीले   से    रहते   हें    गेसू

इस मोड़ के   आने  पर  तो 

दिल बिखरा  रहता है  हरसू  ।  


वो काली सी घटा इक छाई है

और  शाम  में  फ़िर  तन्हाई है 

तूफ़ान  के  अंदेशों  में  बरबस 

सब  ओर   ख़ामोशी   छाई  है ।


सुनसान निगाहों की चितवन 

सुनसान क़ल्ब की है धड़कन 

आकाश  में   पँछी  उड़ता  है 

मानो  सुनसान  हुआ  उपवन ।


इज़हारे   तमन्ना   करने   से 

ख़्यालात  बज़ाहिर करने से 

हालात बदल  नहीं  जाते  हें 

मासूमी  इबादत   करने   से ।


ख़्यालात  तभी तो  आते हें 

जब  ख़्वाब अधूरे  रहते  हें 

जब घुटन सी होने लगती है

वो सिराज बने, चले आते हें । 


गेसू = बाल।हरसू=हर तरफ़। क़ल्ब=दिल।

इज़हारे तमन्ना = इच्छा का बताना। 

बज़ाहिर = ज़ाहिर करना। सिराज=रोशनी।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि।

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