बादल से बरसते हें आँसू
गीले से रहते हें गेसू
इस मोड़ के आने पर तो
दिल बिखरा रहता है हरसू ।
वो काली सी घटा इक छाई है
और शाम में फ़िर तन्हाई है
तूफ़ान के अंदेशों में बरबस
सब ओर ख़ामोशी छाई है ।
सुनसान निगाहों की चितवन
सुनसान क़ल्ब की है धड़कन
आकाश में पँछी उड़ता है
मानो सुनसान हुआ उपवन ।
इज़हारे तमन्ना करने से
ख़्यालात बज़ाहिर करने से
हालात बदल नहीं जाते हें
मासूमी इबादत करने से ।
ख़्यालात तभी तो आते हें
जब ख़्वाब अधूरे रहते हें
जब घुटन सी होने लगती है
वो सिराज बने, चले आते हें ।
गेसू = बाल।हरसू=हर तरफ़। क़ल्ब=दिल।
इज़हारे तमन्ना = इच्छा का बताना।
बज़ाहिर = ज़ाहिर करना। सिराज=रोशनी।
ओम् शान्ति:
अजित सम्बोधि।

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