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Tuesday, June 16, 2026

सआदत

गीत गाता रहूँगा, मैं तुमको मनाता रहूँगा, सदा ही
तुम मानो न मानो, तुम्हें याद आता रहूँगा, सदा ही।

तवक्कुल कोई कुमकुमा तो नहीं, खेलने के लिए
तवक्कुल कोई वसवसा तो नहीं, भूलने के लिए
तवक्कुल है इंसा की शाइस्तगी, तवज्जुन के लिए
तवक्कुल है इंसा की फ़र्ज़ानगी, तवज्जोह के लिए
मैं गाता रहूँगा याद तुमको दिलाता रहूँगा, सदा ही
सुनोगे तवक्कुल की बाबत बताता रहूँगा, सदा ही।

फ़िक्र मुझको नहीं वक्त की, हूँ न पाबंद मैं वक्त का
मिटता नहीं मैं कभी, हूँ न फ़रजन्द मैं वक्त का
निहायत ही फ़ुरसत तलब फ़लसफ़ा है ये तवक्कुल
निहायत ही शायराना ज़लज़ला है ये तवक्कुल
ज़ुलेख़ा और यूसुफ़ रहे हैं ज़माँ में, रहते रहेंगे सदा ही
मैं उनके तराने गाता रहा हूँ, गाता रहूँगा सदा ही।

उल्फ़त के बने अफ़साने ज़माँ में, बनते रहेंगे, सदा ही
दिवाने मगर रहते फ़ितरते दम पर, रहते रहेंगे, सदा ही
ख़ामियाज़ा अगर जो भुगतना है, भुगता करेंगे, सदा ही
मगर दिल की आवाज़ पहिचानते हें, माना करेंगे, सदा ही
सताओ बेफ़िक्र होकर सताओ, सहता रहूँगा, सदा ही
बुलबुला हूँ मैं, दिखता रहूँगा, छिपता रहूँगा, सदा ही।

दरख़्त लहराऐं, हवाऐं सरसराऐं, कुछ तो है इनके परे
बुलबुलें गाऐं, मौजें गुनगुनाऐं, कुछ तो है इनके परे
नूरपाशी कर रहा है चाँद, कुछ तो है इसके परे
तेरे मेरे दरमियाँ ख़ामोशियाँ कुछ तो है इनके परे
ये नग़मे मेरे हें, तेरे माहरू, रहते रहेंगे सदा ही
गुनगुनाते हो अब भी, वही गुनगुनाया करोगे, सदा ही।

रक़ीबो उठाना न ज़हमत पहुँचना है दुश्वार उस तक
लौटते हैं नहीं वो जो इक बार जा पहुँचते हैं, उस तक
दरख़्शाँ है  आलम वहाँ का, वो है ख़ालिक वहाँ की
चश्मे बातिन दिखायेगी नूरी मलबूस उसकी
उसी के ख़्वास्ता नग़मे गाता हूँ गाता रहूँगा सदा ही
वो ही सिखाती लुका छुपी, खेलता रहूँगा सदा ही।

सआदत = सौभाग्य।तबक्कुल = सौंपना।कुमकुमा = खिलौना।
वसवसा = वहम।शाइस्तगी = शिष्टता।तवज्जुन = balance.
फ़र्ज़ानगी = बुद्धिमता।तवज्जोह = care . फ़रज़ंद = उत्तराधिकारी।
फ़ुर्सत तलब फ़लसफ़ा = relaxing ideology.शायराना ज़लज़ला =
poetic quake. ज़ुलेख़ा और यूसुफ़ = सूफ़ी राधा और कृष्ण।
उल्फ़त = प्यार। अफ़साने = किस्से।ज़माँ = ज़माना।फ़ितरते दम पर =
अपनी nature के हिसाब से।ख़ामियाज़ा = नुक़सान।दरख़्त = पेड़।
मौजें = लहरें।नूरपाशी = रौशनी बखेरना।नग़मे = गीत।माहरू=चंद्र प्रभा।
रक़ीबो = competitors. ज़हमत = झंझट।दुश्वार = मुश्किल।दरख़्शाँ =
प्रकाश से भरा।आलम = माहौल।ख़ालिक़ = creatrix. चश्मे बातिन =
inner eye. नूरी मलबूस = रौशनी की पोशाक।ख़्वास्ता = लिये।

ओम् शान्ति:
अजित सम्बोधि।

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