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Tuesday, February 24, 2026

कभी ऐसे चल पड़ा था मैं

 ज़िन्दगी निकल गई चैन भी  मिला  नहीं 

सोचा:क्या है ज़िन्दगी, जान पाया मैं नहीं।


कभी इस राह पर 

चल पड़ा था सब्र कर 

दिल में कान्हा को लिया 

बंद दरवाज़ा किया 

आँख की किनार से 

टपका था कुछ प्यार से 

वक्त ने पुकार दी रुक न पाया मैं मगर 

सूनी सूनी थी डगर नई नई थी डगर।


जिस सिम्त मैं था जा रहा 

नज़र को था घुमा रहा 

हमराज़ कोई बना नहीं 

हमराह कोई दिखा नहीं 

मुझको थी न कोई ख़बर 

पहुँचूँगा मैं कब किधर

लो आँख बंद  हो गईं

लो साँस बंद  हो गई।


मैं सम्हल गया गिरता हुआ 

मैं बैठ गया लुढ़का हुआ 

आँख ऊपर चढ़ गईं 

 कमर सीधी हो गई 

अँधेरा घुलने लग गया 

रौशनी में धुल गया 

मैं बैठा बैठा जम गया 

और सबेरा हो गया!


फ़िर न कह पाया कभी चैन तो मिला नहीं 

या कि ज़िन्दगी को पहिचान पाया मैं नहीं।


वाह कान्हा वाह 

अजित सम्बोधि 

Friday, February 20, 2026

कैसे भुला दूँ तुझे मैं भला

 मैं  सोता  रहा , तू  जगता  रहा

तू हर दम  मुझे  लाड़ करता  रहा 

अब कैसे  भुला दूँ, तुझे  मैं  भला

साँस बनकर  मेरी,  तू बहता  रहा।l


मैं लड़ता  रहा और झगड़ता  रहा 

ख़िलक़त की दौड़ में दौड़ता  रहा 

तू हर वक़्त ख़ैरख़्वाह बन कर  रहा   

दिल की धड़कन बन धड़कता रहा।


क्या कुछ नहीं दे दिया तूने मुझे

सूरज आता रोज़ जगाने को मुझे 

यामिनी आती है सुलाने  को मुझे 

मुफ़्त में मिलतीं ये ख़िदमात मुझे।


पेड़ों को देखो खड़े रहते उम्र भर 

धूप हो सर्दी हो बरखा हो जी भर 

देते छाया, फूल, फल  झोली भर 

और रूह ए रवाँ संजीवनी उम्र भर।


तू हयात बख़्श, सब बख़्शा  रहा है 

बिना माँगे ख़ुद ही अता कर रहा है 

कैसे कोई भुला सकता  है  तुझको 

नक़द दम उदर, परवरिश कर रहा है।


ख़िलक़त = दुनियाँ।ख़ैरख़्वाह = भला चाहने वाला।

यामिनी = रात।ख़िदमात = सेवायें।रूह ए रवाँ = प्राणवायु, O2. 

संजीवनी = जीवन देने वाली। हयात बख़्श = जीवनदाता।

अता = देना।नक़द दम = अकेला।उदर = पेट।परवरिश = nourish.

मुरीद ए ताउम्र = सारी उम्र का follower.


मुरीद ए ताउम्र 

अजित सम्बोधि 

Monday, February 16, 2026

मेरा दोस्त घनश्याम!

चेहरे से चुस्त हो ,  सफ़ा-परस्त   हो
नेक दिल हो, ख़ुश दिल हो, मस्त हो
इतनी ख़ूबियाँ  लिए  फिरते हो  यार 
क्यों न हर दिल  घनश्याम-परस्त हो?

हाँ, सुना करता हूँ तुमको  मैं अक्सर 
तुम्हारी बातें होती हैं  बड़ी पुर-असर
क्या ख़ूब ज़ेहानत पाई है  बरख़ुरदार
मुख़्तसर भी  नहीं  होता है  बे-असर!

रबने बख़्शी है बड़ी इनायत तुम  पर 
झोली भरके  कर  दी कृपा  मयस्सर
प्यार को उड़ेला है मालिक ने तुम  पे
दिल होता बाग़ बाग़ तुम को देखकर।

दिल से दुआऐं भेज रहा हूँ मैं  तुमको 
रब  की रहमत  मिले  दायम  तुमको 
उम्र के आख़िरी पड़ाव  पर बैठा  हूँ मैं 
देख ली  इंसानियत, देख कर  तुमको।

सफ़ा-परस्त = स्पष्ट वादी।पुर-असर = असरदार।
ज़ेहानत = प्रतिभा।मुख़्तसर = रत्ती मात्र।
दायम = हमेशा।दिलनशीं ए ताउम्र = उम्रभर का मित्र।

दिलनशीं ए ताउम्र 
अजित सम्बोधि

Sunday, February 8, 2026

Happy Birthday Arunima!

you are the rosiness of the  rising sun

the sun that gives life to all, bars none 

i wish happy birthday to you arunima 

let rosiness touch the lives of everyone!


life is an invaluable gift given by god

some become uneasy if i mention god!

i don’t know what’s your take on god

but i am sure he has bestowed his nod!


there’s an intelligence that runs the show 

your yen word for it out of the long row?

we are indebted to it, you subscribe to it?

do untold trips round the sun! flow, flow!


wish you a happy birthday again, arunima 

nana