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Wednesday, August 12, 2026

हरियाली अमावस्या।

ये  हरियाली  अमावस्या  है 

पीपल  पूजन ही  तपस्या है 

मत  घबराना  बिल्कुल  भी 

दूर  भागेगी  हर  समस्या  है!


ये सावन  की अति  प्यारी है 

और शिव की राज दुलारी है 

बीच  खड़ी   भरे   सावन   में 

चहुँ  और  छटा  में  न्यारी  है!


हर  ओर  झुकी  हरियाली  है 

हर  तरफ़   छटा  मतवाली  है 

सावन  की  फुहारें   झरती  हैं 

कोयल  की  गूँज  निराली  है!


घनघोर   घटा  घिर   आई  है 

मन-मोरनी   नाचने   आई   है

हर  शाख़   बनी  रक़्क़ासा  है 

क़िस्मत  की   देखो  दुहाई  है!


दिन बना   था आज सुरमई  है 

और  शाम  हो रही  कोकई  है 

मै  सुनता  गुंजन  मधुर   मधुर 

और  समाँ  हो  गया  गौनई  है।


रक़्क़ासा = dancer. दुहाई = पुकार।

सुरमई = सलेटी।कोकई = लालिमा मय।

गौनई = संगीत मय।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

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