रिमझिम की बहारें हैं
पानी की फुहारें हैं
आसमान में देखो देखो
कुरजाँ की कतारें हैं।
ये दूर देश से आईं हैं
पंखों के बल आईं हैं
आसमान में उड़ उड़ कर
खुशियाँ लेकर आईं हैं!
खींचन गाँव खींच के लाया
साइबेरिया से उनको लाया
खींचन का ये प्यारा रिश्ता
कुरजाँ को भी ख़ूब सुहाया।
हर बरस यहाँ वो आती हैं
छह महीने रुक जाती हैं
उड़ उड़ कर गीत सुनाती हैं
हँसती और हँसाती हैं!
कुरजाँ = demoiselle cranes.
खींचन = राजस्थान में जैसलमेर जिले का गाँव।
जय राधे राधे
अजित सम्बोधि

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