जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
यूँ ही नहीं मैंने अब तक गुज़ारे हैं दिन
नहीं लेता हूँ साँस तुझे याद किये बिन
मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा
मेरी हर रात का तू ही बनता रहा सबेरा
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
रात भर दिया जला करता है तेरे लिए
ओस बनके टपकती हैं आँखें तेरे लिए
याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?
याद है तुझे कैसे गुज़ारता मैं अँधेरा?
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
ये मेरी कश्ती है और ये जल की धारा
नज़र आता नहीं है दूर तलक किनारा
पता नहीं कितनी बार लगाना है फेरा?
पता नहीं कितनी बार लगाना है फेरा ?
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
देखो आसमान को छूती हुई पहाड़ियाँ
और धीरे धीरे रेंगती हुई ये पगडण्डियाँ
चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा
चढ़ने में उज़्र नहीं, ग़र मिले दीदार तेरा
जिस दिन दिल भूल जाएगा नाम तेरा
वो दिन आख़िरी होगा ज़िन्दगी का मेरा।
उज़्र = एतिराज़। ग़र = यदि। दीदार = मुलाकात।
क़दमबोस = आदर पूर्वक चरण स्पर्श करने वाला।
क़दमबोस
अजित सम्बोधि

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