Popular Posts

Total Pageviews

Sunday, October 11, 2026

क़िस्मत बदल गई

एक सुबह  आ गई, एक शाम  ढल गई 

रोशन हुआ हूँ जब से क़िस्मत बदल गई।

कुछ सब्ज़ मिल गई

कुछ सुर्ख़  मिल गई 

तन्हा  हुए  थे  लमहे 

कुछ  शाद  मिल गई 

ऐसा बनाया किरदार 

तेरी रहमत मिल गई 

अर्क  के  साथ  साथ 

कुछ   बर्क़ मिल  गई 

नाशाद  दिल को मेरे 

दिल-शाद  मिल  गई 

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


हर सिम्त गुलरंग हो गई 

महकन   से  है  भर  गई 

कोयल की कूक आ गई 

सब ओर फ़िर से छा गई 

दुआओं में बरकत आ गई 

शुआओं में रौनक भर गई 

मन से चकल्लस मिट गई 

गो कि पगधूल मिल गई 

राधा की रहमत मिल गई 

चातक को  बूँद मिल गई 

 रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


मुझे ख़बर नई मिल गई 

रहगुज़र आसान हो गई 

बचपन की याद आ गई 

फ़िक्र   छोड़  दिल   गई 

यादें यादों से  भर  गईं 

सिमट के गले लग गईं 

सपनों में समाअत आगई 

आबे चश्म ख़ुश्क हो गई

दास्तान  ख़त्म  नहीं  हुई 

दास्तान  आबाद  हो  गई

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


अब बस एक ही जुनून है 

कैसे  मिल जाये सुकून है 

ज़िन्दगी एक  दास्तान  है 

नज़रों के लिये आस्तान है 

हर सफ़र नियाज़ी सफ़र है 

चंद सवालात  का असर है 

एक दूजे के दिल में जाना है 

सोई क़िस्मत  को जगाना है 

हाँ  हाँ  मै  हूँ  पूरे  होश  में 

चले आओ मेरे  आग़ोश में 

रोशन हुआ हूँ जबसे क़िस्मत बदल गई।


सब्ज़ = हरी।सुर्ख़ = लाल।तन्हा = अकेले।

लमहे = क्षण।शाद = चैन।किरदार = role.

रहमत = कृपा।अर्क = पसीना।बर्क़ = दामिनी।

नाशाद = नाख़ुश।दिल शाद = दिल की ख़ुशी 

सिम्त = दिशा।गुल रंग = गुलाबी।बरकत = बढ़ोतरी।

शुआओं = किरणों।रहगुज़र = राह।समाअत= श्रवण शक्ति।

आबे चश्म = आँसू।दास्तान = क़िस्सा।जुनून = लगन।सुकून = चैन।

आस्तान = दहलीज़।नियाज़ी = निवेदित।आग़ोश = गले लगना।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

No comments:

Post a Comment