दुर्गा मैया खिवैया वस्तावैया
महिषासुर को दे दी शैया
विनती करता तुमसे मैया
मेरी भी पार लगादो नैया।
काम क्रोध मद लोभ मत्सर
ये सब ही तो महिषासुर
करदो निर्मल तन मन मेरा
बदल दो मैया ये सब सुर।
मैया तो प्रेरित करुणा से
क्या होगा त्रिशूल तलवार से?
मेरा अंतर भर दो करुणा से
मुक़्त करो मुझे महिषासुर से।
महिषासुर बाहर नहीं, है भीतर
मद क्रोध मत्सर बन गये मंगेतर
सदबुद्धि आई, लक्ष्मी आजायेगी
ऐसे मनाऊँ मैं अपना नवरात्तर।
वस्तावैया = कब आ रही हो? (तमिल)
शारदीय नवरात्र सब के लिए मंगलमय हों
अजित सम्बोधि

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