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Wednesday, October 14, 2026

शारदीय नवरात्र

दुर्गा मैया खिवैया वस्तावैया 

महिषासुर  को  दे  दी  शैया

विनती  करता  तुमसे   मैया 

मेरी  भी  पार  लगादो  नैया।


काम क्रोध मद लोभ मत्सर

ये   सब  ही  तो   महिषासुर 

करदो निर्मल  तन  मन  मेरा   

बदल  दो  मैया  ये  सब  सुर।


मैया  तो   प्रेरित   करुणा  से 

क्या  होगा त्रिशूल तलवार से?

मेरा अंतर  भर दो  करुणा  से 

मुक़्त करो  मुझे  महिषासुर से।


महिषासुर  बाहर  नहीं, है भीतर 

मद  क्रोध मत्सर बन गये मंगेतर 

सदबुद्धि आई, लक्ष्मी आजायेगी 

ऐसे  मनाऊँ  मैं  अपना  नवरात्तर।


वस्तावैया = कब आ रही हो? (तमिल)


शारदीय नवरात्र सब के लिए मंगलमय हों 

अजित सम्बोधि 

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