तारीक मिटाता हूँ, तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ, तजवीज़ लगाता हूँ।
दिल एक समन्दर है
नादाँ है, कलन्दर है
महबूब का दरपन है
इंसाफ़ का मसकन है
मन्सूर का मंज़र है
सय्याद का खंजर है
मैं उसका हक़ीक़ी हूँ
अन्दर से क़रीबी हूँ
ग़ैरों की बात नहीं है
अंदर की घात नहीं है
तारीक मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ।
ज़रे सफ़ेद सी राहें हैं
माहे नौ की निगाहें हैं
गुदाख़्त अलमास है
अलसाया ऐहसास है
पिघला हुआ नगीना है
नौशा का सफ़ीना है
मत कहो याद नहीं
ये गुज़री बात नहीं
शैदाई अंदाज़ यही
सावन में भादों यही
तारीक मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ
रात भर सिकंदर की
मानिंद घूमा किया
दिन भर पिसंदर की
तरह फ़ाक़ा किया
तू चाहे फ़लक से पूँछ ले
तू चाहे गुलदुम से पूँछ ले
मुझे तेरा एतिबार है
मुझे तेरा इंतिज़ार है
तेरा कूँचा बड़ा दरबार है
तेरे ख़ुलूस से मुझे प्यार है
तारीक़ मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ।
तुझसे सीखा प्यार मैंने
सबको लगाया गले मैंने
तूने किया बड़ा एहसान
वरना रहता मैं पशेमान
लमहात को बनाया लतीफ़
अलीफ़ को बनाया आलिफ़
मैंने क़सम खाई है
तन्हाई की दुहाई है
तेरा दामन पकड़े रखूँगा
तुझसे न जुदा होऊँगा
तारीक़ मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ।
पर मुझे ये तो बता दे
हाँ सिर पे हाथ रख दे
मुझे तूने ख़ूब भरमाया
अब तक कुछ नहीं बताया
लाख मिन्नतें कीं
किल्लतें भी ख़ूब थीं
ये तो बता देता तू है कौन
क्यों बना रहता है तू मौन
क्या ज़िन्दगी तुझे ढूँढने का नाम है
क्या तुझे ढूँढना ही बस एक काम है
तारीक़ मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ।
देख मुझको और न सता
जब तक न लगेगा ये पता
कि आख़िर तू है कौन
कैसे जानूँगा मैं हूँ कौन
ख़ुद को जानने के लिये ही
ख़ुद को पहिचानने के लिये ही
ख़ाक छानता आ रहा हूँ
ख़ुदी को मिटाता आ रहा हूँ
तुझको ढूँढता फिर रहा हूँ
नाकारा बना फिर रहा हूँ
तारीक़ मिटाता हूँ
तस्वीर बनाता हूँ
तस्दीक़ कराता हूँ
तजवीज़ लगाता हूँ।
तारीक = अँधेरा।तस्दीक़ = प्रमाण।तजवीज़ = तरीक़ा।
कलंदर = मस्ताना।महबूब = प्रिय।मसकन = घर।
मन्सूर = एक सूफ़ी संत।मंज़र = दृश्य।सय्याद = शिकारी।
खंजर = छुरा।हक़ीक़ी = सगा।ज़रे सफ़ेद = चाँदी सा सफ़ेद।
माहे नौ = नया चाँद।गुदाख़्त = पिघला हुआ।अलमास = हीरा।
नौशा = दूल्हा।सफ़ीना = कश्ती।शैदाई = प्रेम दिवाना।
पिसंदर = सौतेला बेटा।फ़ाका = भूख।फ़लक = आसमान।
गुलदुम = बुलबुल।एतवार = भरोसा।ख़ुलूस = सच्चाई।
पशेमान = शर्मिंदा।लमहात = moments.लतीफ़ = निर्दोष।
अलीफ़ = मित्र।आलिफ़ = स्नेहिल।तन्हाई = अकेलापन।
दामन = पल्लू।आमीन = एवमस्तु।
आमीन
अजित सम्बोधि
