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Friday, July 31, 2026

क्यों ख़ुद को तुझ पे मिटा न दूँ?

ये ज़िन्दगी मुझे बख़्श दी 

मैं क्यों न रब को दाद दूँ?

कोई मुस्कुरा के बोल दे

मैं क्यों न खुशियाँ बाँट दूँ?

सावन की झड़ी देख के 

मन करता झूले डाल दूँ?

तुम झूलना झूला करो 

मैं क्यों न रस्सी खींच दूँ?

वो उड़ के आईं बुलबुलें 

मैं क्यों न इनको पनाह दूँ?

ये  अपनापन  दर्शा  रहीं 

दानों की कुछ सौगात दूँ।

पूनम का चाँद खिल उठा 

नौशाद हो, कहो बोल दूँ?

तूने ज़िन्दगी सब कुछ दिया 

क्यों ख़ुदको तुझपे मिटा न दूँ?


रब = ईश।दाद = सराहना।नौशाद = सुन्दर।


जय राधे राधे 

अजित सम्बोधि 

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