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Saturday, September 26, 2026

प्रज्ञा का जन्म दिन

जनम दिन मुबारक हो तुमको प्रज्ञा 

एक बात  बता दूँ  मैं  तुमको  प्रज्ञा 

प्रज्ञा की कभी नहीं होती  है  अवज्ञा 

सबको प्रज्ञा से लेनी होती है अनुज्ञा।


बधाई  हो तुमको  तुम्हारे  नाम पर 

तुम्हें नहीं करना कोई काम डर कर 

तुम्हारा जो है वो सुन्दर आशियाना 

वही रहेगा तुम्हारा दिलकुशा उम्र भर।


नहीं भूल सकता वक़्त जो गुज़रा वहाँ 

मेरी खिड़की से चाँद दिखता था वहाँ 

कई घंटे का साथ देता था मुझको वो 

सटोरी होती थी उसकी चाँदनी में वहाँ।


मैपल का पेड़ भी था मेरा एक साथी वहाँ 

मैं उसकी छाँव में अक्सर बैठता था वहाँ 

रोबिन, रैन, फ़िंच, चिकेडी आती थीं वहाँ 

मैं उनको दाना पानी दिया करता था वहाँ।


प्रज्ञा = अंतर्दृष्टि।अवज्ञा = अवहेलना।

अनुज्ञा = अनुमति।आशियाना = घर।

दिलकुशा = दिल को ख़ुशी देने वाला।

सटोरी = समाधि की एक अवस्था।


जय राधे राधे 

पापा 

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