जनम दिन मुबारक हो तुमको प्रज्ञा
एक बात बता दूँ मैं तुमको प्रज्ञा
प्रज्ञा की कभी नहीं होती है अवज्ञा
सबको प्रज्ञा से लेनी होती है अनुज्ञा।
बधाई हो तुमको तुम्हारे नाम पर
तुम्हें नहीं करना कोई काम डर कर
तुम्हारा जो है वो सुन्दर आशियाना
वही रहेगा तुम्हारा दिलकुशा उम्र भर।
नहीं भूल सकता वक़्त जो गुज़रा वहाँ
मेरी खिड़की से चाँद दिखता था वहाँ
कई घंटे का साथ देता था मुझको वो
सटोरी होती थी उसकी चाँदनी में वहाँ।
मैपल का पेड़ भी था मेरा एक साथी वहाँ
मैं उसकी छाँव में अक्सर बैठता था वहाँ
रोबिन, रैन, फ़िंच, चिकेडी आती थीं वहाँ
मैं उनको दाना पानी दिया करता था वहाँ।
प्रज्ञा = अंतर्दृष्टि।अवज्ञा = अवहेलना।
अनुज्ञा = अनुमति।आशियाना = घर।
दिलकुशा = दिल को ख़ुशी देने वाला।
सटोरी = समाधि की एक अवस्था।
जय राधे राधे
पापा

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