मालिक ने बिटिया बनाई, आँखों का तारा बनाई
करके करम उसने हम पर, सबका सहारा बनाई।
जिस दिन हुईं तुम पराई
वो दिन नहीं भूला हूँ मैं
जिस दिन हुई थी जुदाई
क्यों दुनिया ने ऐसी बनाई, ये रीत क्योंकर बनाई
लाड़ों से पाला था जिसको, क्योंकर वो ही गँवाई।
क्या ग़ज़ब तूने लाड़ली बनाई
जहाँ रहती , ख़ुशियाँ ही लाई
पहिले गोदी हमारी सजाई
अब रौनक उनके यहाँ है लाई
दुनिया ने रीत बनाई, पर लाड़ो से न जीत पाई
अनजान वादियों में जाके, बगिया उसने सजाई ।
जब मालिक ने बिटिया बनाई
सारी चतुराई उसमें लगाई
ख़ुद को रखती है पीछे हरदम
आगे बढ़ कर करती भलाई
वाह मालिक तेरी करिश्माई, क्या ख़ूब तूने दिखाई
ज़िन्दा हैं सब इसी से, तूने जो रहमत दिखाई।
करम = रहमत = ईश्वरीय कृपा।
सब बिटियाओं को प्यार
पापा

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