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Wednesday, November 27, 2024

वो दो घण्टे ( अरावली की वादियों में )

तेरा ख़्वाब मेरा भी ख़्वाब है 

क्यों न कह  दूँ  लाजवाब है 

जो ख़्वाब मैं   न बता  सका 

ये   उसका   ही   जवाब   है।

शादाब    है     नायाब      है 

माहताब  है      आदाब     है।


पेड़ों  से  गल  बहियाँ  चली 

गुलज़मीं  गुलज़ार  हो चली 

जम्बूरात   के   हुज्जूम   से 

 सलामती   मेने   माँग   ली 

ये  ख़्वाब  में  इक  ख़्वाब  है 

बख़ूबी   यहाँ    दस्तयाब   है।


 बतख़ों ने लगाया था डेरा 

मुझे पा के सिमटा वो घेरा 

क्या सूरज सिमट के आगया

 सफेद सरोवर वहाँ बन गया।

प्यार से जियें ज़िन्दगी के लिए 

रानाइयों   में मिला जवाब  है।


आसमाँ  ने   चादर  उढ़ा  दी

मामूनियत की चादर उढ़ा दी

अब  सब महफ़ूज़ हें  यहाँ पे 

तहम्मुल  की  चादर  उढ़ा दी। 

उसी  का   तो  ये  जवाब  है

क्या ख़ूब दायरा ए अहबाब है। 


दो घण्टे  तुमने  बख़्शा  किये

करम है रब  का बख़्शा किये

मेरे  ख़्वाब  बाइस बन  के हँसे

ममनून  तुम्हारा  बख़्शा  किये।

बज  उठा  दिल  का  रबाब  है 

हर सिम्त  ख़ुशियों  का बाब है।


शादाब = हरा भरा। नायाब=unique.

माहताब = चाँद। गुलज़मीं= flower beds. 

गुलज़ार = रौनक़ वाला।जम्बूरात = honey bees.

दस्तयाब = प्राप्त।रानाइयों = सजावटों।

मामूनियत=security. 

तहम्मुल = love. महफ़ूज़ = secure. 

दायरा ए अहबाब = दोस्तों का दायरा।

बाइस=basis. ममनून=thankfulness. 

रबाब = lyre. बाब = दरवाज़ा।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि

Tuesday, November 19, 2024

Nod of the Lord

 Let’s watch every nod

Of the Lord 

That pulsates as breath

In beats of life & death.

To understand 

How things unfold!


It’s the nod

From the Lord

That strikes each chord 

Of our heart to applaud!

It makes us wade a ford 

Or else sign some accord.


No one visits us on one’s own 

Everyone is sent by him, alone!

Let’s welcome, not only as a friend 

Let’s greet breath as a kind of herald!

Don’t shrug it off, it’s from the lord

It is not tailwind. Mark! It’s his nod!


Breath is the nod of god

Breath is endlessly broad.

Let’s prod ourself & plod

To see life in a lump of sod.

Breath enjoins us upon god

To let us in the amity of god!


Om Shantih

Ajit Sambodhi

Thursday, October 31, 2024

संग संग थे दीप जलाने।

कैसे भूले वायदे निभाने?
संग संग थे दीप जलाने!

रख लेता मन में  छुपा के 
सपनों के संग में सजा के।
इबादत के लिए  बचा के
दो घड़ी सब को भुला के।
काहे  न आये  तुम बुलाने
संग संग  थे  दीप  जलाने!

कैसा भी हो भले ही नशेमन
वहीं पर तो मिलता है अमन।
वही तो होता दिल का चमन
दिवाली का हो गया आगमन।
इसी बहाने से आ जाते बुलाने 
संग   संग   थे   दीप   जलाने!

हर गोशा मैं खोजा किया 
जा जा के तलाशा किया।
यादों  ने  किनाया  किया 
तेरी मुस्कान मैं ढूँढा किया।
तुम न आए पे दीप जलाने
संग  संग  थे  दीप  जलाने!

ये  मौक़े  न  हर  दिन आने 
बस बरस में इक बार आने।
क्या इतनी भी फ़ुर्सत न थी 
चले आते जो वायदा निभाने?
कब  आओगे  अश्क़  मिटाने?
संग  संग  थे   दीप   जलाने!

नशेमन = घौंसला। गोशा = कोना।
किनाया= इशारा। अश्क़=आँसू।

दिवाली की शुभ कामनायें
अजित सम्बोधि

दिवाली आ गई।

लो वो आ गई, लो वो आ गई 
मुंतज़िर थे हम, लो वो आ गई।
रौशनतर करने के लिए सबको 
आज फ़िर से याद उसे आ गई।
जिसे कहते हें सब दिवाली, वो 
फ़िर से अपनी दिवाली आ गई।

ज़िन्दगी इक सफ़र है सुहाना
साथ  रहते  हुए  हमने  जाना।
ये नेमतें  जो  हमको  मिली हें 
रब दी किरपा है , हमने  माना।
मिटाने को अँधेरे घनेरे आ गई 
अपनी दिवाली फ़िर से आ गई।

दम ब दम हम यों ही चलते रहेंगे 
मालिक तेरा नाम गुनगुनाते रहेंगे। 
गो कि  हम  बहकते  भी  रहते हें 
मुनव्वर  तेरे पास, हम आते रहेंगे।
तू हमारा है , दिलाने याद  आगई
प्यारी दिवाली आज फ़िर आ गई।

मुंतज़िर=इंतिज़ार करने वाला।
रौशनतर= और अधिक रौशन।
दम ब दम= हर दम।गो कि= यद्यपि।
मुनव्वर=ईश्वर।

दिवाली की शुभ कामनाएँ 
अजित सम्बोधि 

Wednesday, October 30, 2024

Festival of Lights!

We call Festival of Lights, Diwali!

It’s the biggest festival beside Holi.

Holi uses colors and Diwali floods

Of lights, to make everybody jolly!


Diwali drives away  all  darknesses 

That everyone one day experiences.

Yes, darkness has so many contours

But light  lights up all  the  recesses!


Light, yes, natural light, is life giving 

Its modes and colors keep on altering.

It may swap  sunning for burning, Or

It may melt the heart, it’s so softening!


I wish everyone a very happy Diwali 

Be he Chandan, Changez, or  Charlie!

Look for this lively wizard inside you 

Where there transpires nonstop Diwali!


Your chum

Ajit Sambodhi

Monday, September 16, 2024

है कोई अपना?

कोई आज तक , छू तक न पाया , अन्दर में मेरे 
सारी ख़ुशियाँ हटा न पाईं उदासियों के साए मेरे ।

इसमें किस को कुसूरवार ठहराऊँ आख़िर में मैं 
उसको या नसीब को? दौनों का तलबगार हूँ मैं।

तंग आगया हूँ मिलते मिलते लोगों के किरदार से
अरसा होगया है मुझको मिले हुए किसी अपने से।

कभी ऐसे ही चले आना, आकर के मिल भी जाना
बहाने बनाकर के तो हरकोई करता है आना जाना।

पता है कितने दिन बीत गए हें मुस्कुराहट देखे बगैर
बस मसनूई मुस्कुराहट दिखाई देती है, यही है ख़ैर।

एक दौर था जब चाँद सुन्दर हुआ करता था, है न?
एक अरसा हुआ अब दाग़दार  लगने लगा है, है न?

तलबगार=तलाश करने वाला।मसनूई= कृत्रिम।

ओम् शान्ति:
अजित सम्बोधि                                                                                                                                                      
                                                                                                                                                                               

Monday, August 26, 2024

कान्हा का जन्मदिन!

आज एक अजन्मे का जन्मदिन है, कान्हा 

है न कितना बड़ा अजूबा आज ये, कान्हा 

ये भादों में कृष्ण पक्ष की अष्टमी है, कान्हा 

आज तुम्हारा ही अद्भुत जनमदिन है, कान्हा!


ये दुनिया तुम्हारी, और मैं भी तुम्हारा, कान्हा 

तुम आते रहे हो अब आ जाओ फ़िर से कान्हा 

कितने जन्मों से तुमको पुकारता आ रहा हूँ मैं 

अबके न फ़िर से मायूस करो, मुझको कान्हा।


तुमने पैर धोये अपने  बाल सखा के, ऐ कान्हा 

अबकी बार अपने चरण हमसे धुला लो कान्हा 

 तुम तो लीला दिखाने में माहिर हो बेहद कान्हा 

अबके मेरे आँगन में भी दिखा दो खेला  कान्हा।


तुम्हारे सिवाये, अब कहाँ पे ढूँढूँ सहारा, कान्हा 

मेरे मन का अँधेरा कैसे मिटेगा, बताओ कान्हा 

रिझावों भुलावों का सहारा नहीं चाहिए, कान्हा 

तेरी रहमत के सिवा मुझे कुछ न चाहिये कान्हा।


लक्ष्मी चंचला से न बहलाना तुम मुझको कान्हा 

ये खिलोना न कभी बहला पायेगा मुझको कान्हा 

तू बस बना ले मुझको अपना पसन्दीदा कान्हा 

तमन्ना है कि उँगली पकड़ कर चलूँ तेरी कान्हा।


मेरी आँखों के ये आँसू तो कभी देख ले, कान्हा 

ये जमुना की धारा है, तट पे फ़िर आजा कान्हा 

ये दिल की वादियाँ कब से सूनी पड़ी हें कान्हा 

कभी बाँसुरी फ़िर से इनमें बजा तो दे, कान्हा।


तुम्हारी मुस्कुराहट का कोई सानी है क्या कान्हा 

तुम शरारत करते थे और मुस्कुरा देते थे कान्हा 

तुम मक्खन चुराते थे और मटकी फोड़ते थे कान्हा 

पर तुम्हारी मुस्कुराहट सबको रिझाती थी कान्हा।


कान्हा के जन्मदिन पे सबको बधाइयाँ!

अजित सम्बोधि 

Saturday, July 13, 2024

क़दमबोसी की चाहत कबसे कर रहा हूँ

मालिक तेरा फ़ज़ल है, जिससे मैं जी रहा हूँ 

बख़्शा है तूने जो कुछ, उसीसे मैं  जी रहा हूँ 
मुझमें कहाँ थी हिकमत, तुझ को पा सकूँ मैं
तेरा ही करम तो है ये , मैं  उसी से जी रहा हूँ।

जब से  सम्हाला  होश , मैं चलता  जा रहा हूँ 
मुश्किलों के दरीचों के पार , बढ़ता जा रहा हूँ 
ज़िन्दगानी  रहगुज़र, दम ब दम बनती  रही है  
तेरे क़दमों की आहट मैं , हरदम सुनता रहा हूँ।

मुझको तेरी ही चाहत , अरसे से  कह रहा हूँ 
जो कुछ भी है वो तेरा , तुझसे  ही पा  रहा हूँ 
नज़रे इनायत का तेरी , हूँ  मोहताज  हर पल 
क़दमबोसी की चाहत मैं , कबसे कर  रहा हूँ।

ये ना समझ लेना कि , मैं  बहाना बना रहा हूँ 
तुझको लुभाने को कोई, जाजम बिछा रहा हूँ 
मेरी ग़ैरत को न इतना, कम करके तू आँकना
मैं हार करके सब कुछ , तेरी दुआ कर रहा हूँ।

क़दमबोसी=क़दम चूमना। हिकमत=योग्यता।
करम=कृपा।रहगुज़र=राह। दम ब दम=पल पल।
ग़ैरत=ख़ुद्दारी। क़दमबोस=क़दम चूमने वाला।

क़दमबोस
अजित सम्बोधि।

Saturday, June 1, 2024

नज़रों से पर नज़र न आए ।

बातें करने फिर फिर आए 
नज़रों से पर नज़र न आए 
शाम हुईँ सूनी हें जबसे 
ढलता सूरज रुक ना पाए।

कभी  दूर  से  पास  बुलाए
कभी यूँ ही फ़िर रूँठ के जाए, समझ न आए 
उलझी उलझी  इन  राहों में
दिल घबराए, पार न पाए, निकल न पाए।
बातें करने फिर फिर आए 
नज़रों से पर नज़र न आए ।

मुझे कोई क्यों, यूँ भरमाए 
धूमिल सी परछाईं बनके, अपने ही सपने बन आए
मन   के   अंधेरे , शाम  सबेरे
भूली यादें लेकर आए, भोला मन फिर फिर चकराए।
बातें करने फिर फिर आए 
नज़रों से पर नज़र न आए ।

ख़्वाब बने हैं शाम के साये
दर्द   भरे   बादल   घहराये, कैसे छाए, मन को डराये
सब कुछ  तो  है रीता  रीता 
मन बहलाने आँसू आए, लौट लौट के फिर फिर आए।
बातें करने फिर फिर आए
नज़रों से पर नज़र न आए ।

दिल के भेद न हर कोई जाने
गहरे उतरे सो ही जाने, सूने को सूना पहिचाने
खोई खोई सी ये आँखें, भारी भारी सी ये साँसें 
हर कोई इनको पढ़ नहीं पाए, समझाने से समझ न पाए।
बातें करने फिर फिर आए 
नज़रों से पर नज़र न आए।

ओम शान्ति:
अजित सम्बोधि।

Tuesday, May 14, 2024

शब-ओ-रोज़ ये दिया जल रहा है।

 किसके लिये ये समाँ सज रहा है

शब-ओ-रोज़ ये दिया जल रहा है?

क्या आसमाँ को   यक़ीं हो रहा है 

फ़रिश्ता ए नूर  इधर  आ  रहा  है?


खड़ी थी साहिल पे अरसे से कश्ती 

क्या उसे अब माँझी नज़र आ रहा है?

क्या बहारों ने पैग़ाम अब  दे दिया है 

फ़ुरकत  का वक़्त  बिदा हो रहा  है?


कोई भी रिश्ता हो, अभी का नहीं है 

हर रिश्ता अज़ल से चला आ रहा है 

रूहों से ही सदा, जिस्म सजते रहे हें

ये दस्तूर पुराना है, चला आ रहा है ।


न कोई था जुदा और न होगा जुदा 

जिस्मानी चोग़ा ही बदलता रहा है।

मुद्दतों से सिलसिला चलता रहा है 

वही नूर बनके  यहाँ पे बह  रहा  है ।


शब-ओ-रोज़ = रात दिन।

फुरकत=जुदाई। अज़ल= प्रारम्भ।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि।

Tuesday, April 23, 2024

जीत ही गई ये दुनिया

न चाहते हुए भी मिल गई ये दुनिया 
बड़ी  पुरअसर है  साहब ये  दुनिया।

मैं कहता ही रहा, मुझ पर रहम करो 
ख़ैरात में भी नहीं  दरकार ये  दुनिया।

हाँ  मैं  बिल्कुल  होश  में हूँ,  साहब
नहीं चाहिए मुझे आपकी ये दुनिया।

ये दुनिया जो बदलती है रंग हर दम
हर रंग पे रिझाने में माहिर ये दुनिया।

दामन  में  दाग़  लगा  लगा  करके 
जीतने का हुनर सिखाती  ये दुनिया।

हरदम ऐजाज़ होते रहते हैं कायनात में 
मग़र हशर: ए मगज़ में उलझी ये दुनिया।

ये गोली तमंचे  चीख़ों  की दुनिया 
नहीं चाहिए मुझे ये  ख़ूँरेज़ दुनिया।

सिक्कों के आगे सिमटती ये दुनिया 
नहीं चाहिए ग़ैरत लुटाती ये दुनिया।

शफ़्फ़ाफ़ निगाहें नापसंद हैं इसको 
रूहानियत  दफ़्न करती ये  दुनिया।

वो सितम ढाते हैं और मुस्कुराते हैं 
है न  सितम-ज़रीफों  की ये दुनिया?

हूँ अकेला, खड़ा देखता हूँ ये दुनिया 
थक चला हूँ , जीत ही गई ये दुनिया?

पुरअसर = प्रभाव शाली ।ऐजाज़=चमत्कार। 
कायनात= स्रष्टि।हशर: ए मगज़= दिमाग़ी कीड़ा।
ख़ूँरेज़ = ख़ून बहाने वाली।ग़ैरत = लज्जा। 
शफ़्फ़ाफ़= पारदर्शी।रूहानियत = non-materialism.
सितम-ज़रीफ़=हँस हँस के क़त्ल करने वाला।

ओउम् शान्ति:
अजित सम्बोधि।

Thursday, April 18, 2024

आज बस मुस्कुरा देना!

  बस कोई मुस्कुरा भर दे, इतना ही चाहता हूँ 

यह करम मुझ पर कर दे, इतना ही चाहता हूँ।

 वो मुस्कान ए लब हो या इब्तिसामे चश्म हो 

यह तोहफ़ा  है प्यार का, इसे पाना चाहता हूँ।


मुझे नहीं चाहिए बड़े बड़े वायदे वो प्यार के 

ना ही मुझे  चाहिए वो अल्फ़ाज़  इकरार के।

बोल दिया तो बात का वज़न बिखर जाता है 

बिना बोले कहदेना, ये जादू पास मुस्कान के !


ये बड़ी नायाब दौलत है, यही जो मुस्कुराहट है 

नाहीं वहाँ कोई आहट है और नाहीं घबराहट है।

न बातों को चमकाने की  कोई खुसफुसाहट है 

बस चेहरे पे लिख जाती दिलकी जगमगाहट है!


अगर जो रश्क है मुझसे, बस मुस्कुरा भर देना 

मैं पास में हूँ या दूर में हूँ, बस मुस्कुरा भर देना।

लफ़्ज़ तो बेमानी हो जाते हें उस सुकूत के आगे 

जिसका काम है  दम ब दम, सुकून से  भर देना!


मुस्कान ए लब= होठों पे मुस्कान। 

इब्तिसामे चश्म = आँखों में मुस्कान।

रश्क= किसी के जैसा होने की चाहत।

सुकूत= ख़ामोशी। सुकून = चैन।


ओम् शान्ति:

अजित सम्बोधि।

Sunday, April 7, 2024

Happy birthday to you, Alok!

 Happy birthday to you, Alok!

How you remind me of an oak?

Yea yea the same familiar oak!

The dependable & durable oak!


Hallmark marks one’s consistency 

Piston pin of fealty and constancy!

Consistency builds the momentum 

Essential.  for  gaining   efficiency!


It’s not a  matter of  some joke 

To remove the billowing smoke 

Of rampant ignorance and then

Become  timeless  like  the oak!


One has to bet oneself to evoke 

As  if  one  is  going  to  invoke 

The essentiality of being an oak!

Happy  birthday  to  you, Alok!


Om Shantih

Ajit Sambodhi 

Saturday, March 30, 2024

Happy birthday, Jaya!

 Moon  was  crescent  pale

But eager to smile and hail!

Breeze was  all  fragrance 

To welcome the sun’s trail !


All  eyes  were  set  upon 

The bracing morning sun

To decamp night’s trance

And bless the early frisson!


Then a flicker of smile 

Lit  up  the  last  mile

A slit of benediction opened 

And blessed us for a while!


At the rising of the sun

In nineteen seventy one

Into our lives entered 

Rhythms of moon & sun!


Happy birthday, Jaya 

Papa 

Monday, March 25, 2024

होली 2024!

वो पूँछते हें क्यों रंगो से हम 

ये घोल बनाया करते हें 

फिर आते जाते पथिकों को 

क्यों रंग बिरंगा करते हें?


ये रंग करिश्मा करते हें 

सब भेद मिटाया करते हें 

ग़ैरों को भी इन रंगों से 

हम अपना बनाया करते हें!


 जब ख़ुशी मनानी होती है 

हम रंग लपेटा करते हें

ख़ुशियों को जी भरके फ़िर

हम जीवन से लपेटा करते हें।


होली पे बसन्ती मौसम की 

एक झलक दिखाया करते हें 

पुरवैय्या के रंगीन थपेड़े

नई छटा बखेरा करते हें!


ये जीवन तो रब की नेमत

जीवन को सजाया करते हें 

दो घड़ी कहीं भी मिलकर के 

हम हँसना हँसाना करते हें!


ये करम है मालिक का जो हम 

ये मिलना मिलाना करते हें

हर फ़िज़ा चमकने लगती है 

जब गुलाल उड़ाया करते हें ।


फ़िर आगे मिलने का वायदा 

जाने से पहिले करते हें

रब की ये मेहर बानी है 

वायदा भी निभाया करते हें !


होली की शुभ कामनायें

अजित सम्बोधि।

Sunday, March 24, 2024

Holi 2024

 Holi is wonderful

It’s   so   colourful!

Be you young or old 

It makes you playful!


Holi is no roly poly 

It’s  straight & holy

It’s sanctifying fire

It burns the unholy!


Air  we  have  fouled

And  water  is dirtied

Skies are all blighted

Earth has been tainted.


Only the fire is  pure

And it’ll remain pure

We just can’t defile it 

Of this, are  we  sure ?


True, we’ve progressed 

But haven’t we messed?

Before going to the Mars 

Let the earth be cleansed!


Let’s sing happy holi

Let’s play happy holi 

Holi is the holy refiner

Let’s chant happy holi !


Happy holi, everyone!

Ajit Sambodhi 

Monday, March 11, 2024

Merry birth anniversary, Anuv!

Wish you a merry anniversary!

Wish you a merry anniversary!


You turn eighteen, ya, eighteen

Long  since  you  were a tween!

There’s not much time left now 

For you to say quits as of a teen!

Wish you a merry anniversary!

Wish you a merry anniversary!


Life has many twists  and  turns 

Graphic bends where one learns!

Don’t think you are alone in this 

They are everybody’s concerns!

Wish you a merry anniversary !

Wish you a merry anniversary!


I am no  better as  a soothe sayer 

But I’ve seen it happen anywhere 

Nineteen is  the teen  that  decides

Where you’re headed to from here!

Wish you a merry anniversary!

Wish you a merry anniversary!


Everyone  learns   how  to  earn

Only a few learn how to discern!

Humans  have  the gift of  vision 

A cloak that doesn't let them burn!

Wish you a merry anniversary!

Wish you a merry anniversary!


Bless you!

Nana

Friday, March 8, 2024

कौन हें शिव ?

 शिव  मतलब शव मतलब शून्य

शून्य यानि सूना, ये ही तो पर्याय।

क्या वह गोचर है  यानि द्रश्य  है  

अथवा  कि  अगोचर  या  अद्रश्य ?


शिव को समझना है, जानना है ?

मतलब है कि शून्य में उतरना है?

यानि कि शून्य में स्थिर होना है?

यानि कि ध्यनावस्थित  होना है?


यही  तो स्वयं  को  जानना   है 

हम शून्य हें , यही पहिचानना है।

शून्य से उठते स्पन्द बताते हें कि

हम अक्षर हें! इसी को देखना है!


ध्यान  तो प्रत्याहार में  छिपा है 

और ध्यान  में   शून्य  छिपा  है।  

शून्य  के  लोच  में  अगोचर  है 

उसके अक्स में गोचर  छिपा  है ! 


जो  शून्य  है  वही  चेतन्य  है 

वही  समितिंजय  मृत्युंजय है 

वही अविभाज्य अपरित्याज्य

शिव  है, वन्दनीय  है, पूज्य है !


शिवोहं शिवोहं

अजित सम्बोधि

Thursday, March 7, 2024

बहिना की पाती भैय्या के नाम !

 दिव्या के पापा, मेरे भैय्या, भारत से यहाँ पे आये हें

ढेरों  सारी ख़ुशियों  की, सौगात को संग में  लाये हें।


भैय्या तेरा यहाँ पे आना, है जैसे ख़ुशियाँ बाँटते जाना

बस देते जाना देते जाना, यादें दिल  की याद दिलाना।


सर्व  प्रथम, सदैव, सर्वत्र, दिव्य  दृष्टि  को  अपना  कर 

दिव्या प्यारी लेके आई, ज्ञान, ध्यान और प्यार का सागर।


पश्चिम में अमरीका आके, आलोक को संगी अपना बनाके

सम्मान की गागर पूरी भर दी, स्वयं  ही सारा  बीड़ा उठा के।


यहाँ रहें या और कहीं हम,  पायें हर दम दुनिया की ख़ुशियाँ

भाई बहिन का प्यार हमारा, लाये हर दिन ख़ुशियों पे ख़ुशियाँ।


आओ सब  मिलकर  के यहाँ पर, ख़ुशियों का  अम्बर  फैलायें

नाचें  गायें, धूम  मचायें, हम  ख़ुशियों  की,  दुनियाँ  बन  जायें।


जया कमल 

( मेरी बहिना)

Sunday, March 3, 2024

Happy wedding anniversary

  We love to recast the past

We love  to  visit  the  past 

Because it is, so  nostalgic!

We love to recreate the past!

Happy wedding anniversary!

Happy wedding anniversary!


For  the  unwed, to  be  wed

Is a  great  time  to  be  glad 

Just try  to go  into  the  past

See how fast the time’s fled!

Happy wedding anniversary!

Happy wedding anniversary!


Twenty four years in a row 

That’s how  we tick and go!

Life sails like a boat when 

We let it flow with the flow!

Happy wedding anniversary!

Happy wedding anniversary!


One need never become sad

Being sad is  like being mad

Let’s charge  life  with  love 

To  make  it  easier  to  tread!

Happy wedding anniversary!

Happy wedding anniversary!


God  bless  the  doting  pair

Who  lead  a life  that’s  fair

Bred on love & compassion 

Their byword is love & care!

Happy wedding anniversary!

Happy wedding anniversary!


Om Shantih 

ajit sambodhi